Monday , September 28 2020

Zulf Shayari

Zulf Shayari Poetry

 

Zulf Shayari – जब शायरी की बात हो और घटाओ का ज़िक्र हो तो जेहन में बस एक ही ख्याल आता हैं, वो बस अपनी मसूका की जुल्फों का… दिल बस यही कहता हैं उनकी जुल्फों के साए में हर सुबहो शाम गुज़रे, हर शायर अपनी शायरी में अपनी मसूका की तारीफ जुल्फों से करता हैं, कभी काली घटाए बन कर, कभी ठंडी छाँव बन कर, कभी उलझे दिल के अरमान बन कर, कभी सुहानी रात बन कर… शायर की कलम इस तरह जुल्फों में खो जाती हैं, जैसे चाँद बादल में छुप जाता हैं…

 

हर प्रेमी अपनी प्रेमिका की जुल्फों की छाँव में रहना चाहता हैं, उन पर सिर्फ अपना हक चाहता हैं साहिर लुधियानवी ने फिल्म कभी कभी के गाने में इस बात का भी जिक्र किया हैं की “ये गेसुओं की घनी छाँव हैं मेरी ख़ातिर”, ये होंठ और ये बाहें मेरी अमानत हैं… हर मोहबत का दीवाना अपनी महबूबा की जुल्फों की छाँव में रहना चाहता हैं, और उसे संवारना चाहता हैं और उससे खेलना चाहता हैं.. आरज़ू लखनवी का वो शेर याद आता हैं जिसमे उन्होंने बड़े ही प्यार और मोहब्बत से कहा की “पूछा जो उनसे चाँद निकलता है किस तरह, ज़ुल्फ़ों को रूख पे डाल के झटका दिया कि यूँ” ।