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2 Line Dua Poetry In Hindi

2 Line Dua Poetry In HIndi

2 Line Dua Poetry In Hindi

2 Line Dua Poetry In Hindi बेहतरीन और चुनिंदा शायरी का संग्रह जो की दुआ शब्द को बहुत ही शानदार तरीके से वर्णित करता है ! दुआ पर हिंदी के ये शेर, आपके प्यार और भावनाओं को वक़्त करने में आपकी मदद कर सकते हैं ! यहाँ आप हर तरह की शायरी को पढ़ सकते है और अपने चाहने वालों को शेरे कर सकते हैं !

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Famous Dua Poetry In Hindi.

Auron ki burai na dekhun wo nazar de,
Haan apni burai ko parakhne ka hunar de.

औरों की बुराई को न देखूँ वो नज़र दे,
हाँ अपनी बुराई को परखने का हुनर दे !

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Main kya karun mere qatil na chahne par bhi,
Tere liye mere dil se dua niklati hai.

मैं क्या करूँ मेरे क़ातिल न चाहने पर भी,
तेरे लिए मेरे दिल से दुआ निकलती है !

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Abhi raah mein kai mod hain koi aayega koi jayega,
Tumein jis ne dil se bhula diya usse bhulne ki dua karo.

अभी राह में कई मोड़ हैं कोई आएगा कोई जायेगा,
तुम्हें जिस ने दिल से भुला दिया उसे भूलने की दुआ करो !

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Aakhir dua karein bhi to kis mudda ke saath,
Kaise zmeen ki baat kahein aasman se hum.

आखिर दुआ करें भी तो किस मुद्दे के साथ,
कैसे ज़मीन की बात कहें आसमान से हम !

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Abhi jinda hai maa meri mujhe kuch bhi nahi hoga,
Main ghar se jab nikalta hun dua bhi saath chalti hain.

अभी ज़िंदा है माँ मेरी मुझे कुछ भी नहीं होगा,
मैं घर से जब निकलता हूँ दुआ भी साथ चलती हैं !

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Dua ko haath uthate huye larjta hun,
Kabhi dua nahi mangi thi maa ke hote huye.

दुआ को हाथ उठाते हुए लरजता हूँ,
कभी दुआ नहीं मांगी थी माँ के होते हुए !

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Jab bhi kashti meri selaab mein aa jati hai,
Maa dua karti huyi khwaab mein aa jati hai.

जब भी कश्ती मेरी सैलाब में आ जाती है,
माँ दुआ करती हुई ख्वाब में आ जाती है !

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Jate ho khuda hafeez haan itni guzarish hai,
Jab yaad hum aa jayein milne ki dua karna.

जाते हो ख़ुदा हाफ़िज़ हाँ इतनी गुज़ारिश है,
जब याद हम आ जाएं मिलने की दुआ करना !

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Kyun mang rahe ho kisi baarish ki duayein,
Tum apne shiksta dar-o-deewar to dekho.

क्यों मांग रहे हो किसी बारिश की दुआएं,
तुम अपने शिकस्ता दर-ओ-दीवार तो देखो !

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Mang lun tujhse tujhi ko ki sabhi kuch mil jaye,
Sau sawalon se yahi ek sawal achcha hai.

मांग लूं तुझसे तुझी को की सभी कुछ मिल जाये,
सौ सवालों से यही एक सवाल अच्छा है !

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Mujhe zindagi ki dua dene wale,
Hansi aa rahi hai teri sadgi par.

मुझे ज़िन्दगी की दुआ देने वाले,
हंसी आ रही है तेरी सादगी पर !

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Koi charaah nahi dua ke siwa,
Koi suna nahi khuda ke siwa.

कोई चराह नहीं दुआ के सिवा,
कोई सुना नहीं खुदा के सिवा !

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Hazar bar jo manga karo kya hasil,
Dua wahi hai jo dil se kabhi nikalti hai.

हज़ार बार जो माँगा करो क्या हासिल,
दुआ वही है जो दिल से कभी निकलती है !

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Dua karo ki ye paudha hara hi lage,
Udasiyon mein bhi chehra khila hi lage.

दुआ करो कि ये पौधा हरा ही लगे,
उदासियों में भी चेहरा खिला ही लगे !

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Dua karo ki main us ke liye dua ho jaun,
Wo ek shakhas jo dil ko dua sa lagta hai.

दुआ करो कि मैं उस के लिए दुआ हो जाऊं,
वो एक शख्स जो दिल को दुआ सा लगता है !

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Mangi thi ek bar dua hum ne maut ki,
Sharminda aaj tak hain miyan zindagi se hum.

मांगी थी एक बार दुआ हम ने मौत की,
शर्मिंदा आज तक हैं मियां ज़िन्दगी से हम !

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Marz-e-ishq jise ho usse kya yaad rahe,
Na dawa yaad rahe aur na dua yaad rahe.

मर्ज़-ए-इश्क़ जिसे हो उससे क्या याद रहे,
न दवा याद रहे और न दुआ याद रहे !

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Maine din raat khuda se ye dua mangi thi,
Koi aahat na ho dar par mere jab tu aaye.

मैंने दिन रात खुदा से ये दुआ मांगी थी,
कोई आहट ना हो दर पर मेरे जब तू आये !

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Dur rahti hain sada un se balayein sahil,
Apne maa-baap ki jo roz dua lete hain.

दूर रहती हैं सदा उन से बलायें साहिल,
अपने माँ-बाप की जो रोज़ दुआ लेते हैं !

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Kisi ne chum ke aankhon ko ye dua di thi,
Zameen teri khuda motiyon se num kar de.

किसी ने चुम के आँखों को ये दुआ दी थी,
ज़मीन तेरी खुदा मोतियों से नुम कर दे !

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Tu salamat raho qayamat tak,
Aur qayamat kabhi na aaye “Shad”.

तू सलामत रहो क़यामत तक,
और क़यामत कभी न आये “शाद” !

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Wo bada rahim o qareem hai mujhe ye sifat bhi ataa kare,
Tujhe bhulne ki dua karun to meri dua mein asar na ho.

वो बड़ा रहीम ओ करीम है मुझे ये सिफ़त भी अता करे,
तुझे भूलने की दुआ करूँ तो मेरी दुआ में असर न हो !

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Ye bastiyan hai ki maqlat dua kiye jaye,
Dua ke din hai musalsal dua kiye jaye.

ये बस्तियां है की मकलत दुआ किये जाये,
दुआ के दिन है मुसलसल दुआ किये जाये !

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Wo sarkhushi de ki zindagi ko sharaab se bahar yaab kar de,
Mere khayalon mein rang bhar mere lahu ko sharaab kar de.

वो सरखुशी दे की ज़िन्दगी को शराब से बाहर याब कर दे,
मेरे ख्यालों में रंग भर मेरे लहू को शराब कर दे !

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Jaban pe shikwa-e-mehri-e-khuda kyun hai,
Dua to mangiye “Aatish” kabhi dua ki tarah.

जबान पे शिकवा-ए-मेहरी-ए-खुदा क्यों है,
दुआ तो मांगिये “आतिश” कभी दुआ की तरह !

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Hijr ki shab nala-e-dil wo sada dene lage,
Sunane wale raat ktne ki dua dene lage.

हिज्र की शब् नाला-ए-दिल वो सदा देने लगे,
सुनने वाले रात कटने की दुआ देने लगे !

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Kya-kya duayein mangte hain sab magar “asar”,
Apni yahi dua hai koi mudda na ho.

क्या-क्या दुआएं मांगते हैं सब मगर “असर”,
अपनी यही दुआ है कोई मुद्दा न हो !

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Sahraa ka safar tha to shajar kyun nahi aaya,
Mangi thi duayein to asar kyun nahi aaya.

सहरा का सफर था तो शजर क्यों नहीं आया,
मांगी थी दुआयें तो असर क्यों नहीं आया !

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Dekh kar tul-e-shab-e-hijr dua karta hun,
Wasl ke roz se bhi umar meri kam ho jaye.

देख कर तूल-ए-शब्-ए-हिज्र दुआ करता हूँ,
वस्ल के रोज़ से भी उम्र मेरी कम हो जाये !

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Raah ka sajar hun main aur ek musafir tu,
De koi dua mujh ko le koi dua mujh se.

राह का सजर हूँ मैं और एक मुसाफिर तू,
दे कोई दुआ मुझ को ले कोई दुआ मुझ से !

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Bhul hi jayein hum ko ye to na ho,
Log mere liye dua na karein.

भूल ही जाएं हम को ये तो न हो,
लोग मेरे लिए दुआ न करें !

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Aate hain barg-o-baar darkhaton ke jism par,
Tum bhi uthao haath ki mausam dua ka hai.

आते हैं बर्ग-ओ-बार दरख़्तों के जिस्म पर,
तुम भी उठाओ हाथ कि मौसम दुआ का है !

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Na charagar ki jrurat na kuch dawa ki hai,
Dua ko haath uthao ki gham ki raat kate.

न चारागर की जरुरत न कुछ दवा की है,
दुआ को हाथ उठाओ की ग़म की रात कटे !

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Dushman-e-jaan hi sahi dost samjata hun usse,
Bad-dua jis ki mujhe ban ke dua lagti hai.

दुश्मन-ए-जाँ ही सही दोस्त समझता हूँ उसे,
बद-दुआ जिस की मुझे बन के दुआ लगती है !

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Kaun deta hai mohabbat ko parstish ka maqam,
Tum ye insaaf se socho to dua do hum ko.

कौन देता है मोहब्बत को परस्तिश का मक़ाम,
तुम ये इन्साफ से सोचो तो दुआ दो हम को !

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Us marz ko marz-e-ishq kaha karte hain,
Na dawa hoti hai jis ki na dua hoti hai.

उस मरज़ को मरज़-ए-इश्क़ कहा करते हैं,
न दवा होती है जिस की न दुआ होती है !

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Zameen ko aye khuda wo jaljala de,
Nishan tak sarhdon ke jo mita de.

ज़मीं को ऐ ख़ुदा वो ज़लज़ला दे,
निशाँ तक सरहदों के जो मिटा दे !

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Ek teri tamana ne kuch yesa nawaza hai,
Mangi hi nahi jati ab koi dua hum se.

एक तेरी तमन्ना ने कुछ ऐसा नवाज़ा है,
माँगी ही नहीं जाती अब कोई दुआ हम से !

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Maut mangi thi khudai to nahi mangi thi,
Le dua kar chuke ab tark-e-dua karte hain.

मौत माँगी थी ख़ुदाई तो नहीं माँगी थी,
ले दुआ कर चुके अब तर्क-ए-दुआ करते हैं !

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Haye koi dawa karo haye koi dua karo,
Haye jigar mein dard hai haye jigar ka kya karun.

हाए कोई दवा करो हाए कोई दुआ करो,
हाए जिगर में दर्द है हाए जिगर का क्या करूँ !

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Us dushman-e-wafa ko dua de raha hun main,
Mera na ho saka wo kisi ka to ho gaya.

उस दुश्मन-ए-वफ़ा को दुआ दे रहा हूँ मैं,
मेरा न हो सका वो किसी का तो हो गया !

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Gham-e-dil ab kisi ke bas ka nahi,
Kya dawa kya dua kare koi.

ग़म-ए-दिल अब किसी के बस का नहीं,
क्या दवा क्या दुआ करे कोई !

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Ye mozja bhi kisi ki dua ka lagta hai
Ye shehar ab bhi usi bewafa ka lagta hai.

ये मोजज़ा भी किसी की दुआ का लगता है,
ये शहर अब भी उसी बे-वफ़ा का लगता है !

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Buland haathon mein zanjir dal dete hain,
Ajib rasm chali hai dua na mange koi.

बुलंद हाथों में जंजीर डाल देते हैं,
अजीब रस्म चली है दुआ ना मांगे कोई !

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Ye iltija dua ye tamana fuzul hai,
Sukhi nadi ke paas samundar na jayega.

ये इल्तिजा दुआ ये तमना फ़ुज़ूल है,
सूखी नदी के पास समुन्दर न जायेगा !

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Koi to phool khilaye dua ke lahze mein,
Ajab trah ki ghutan hai hawa ke lahze mein.

कोई तो फूल खिलाए दुआ के लहज़े में,
अजब तरह की घुटन है हवा के लहज़े में !

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Main zindagi ki dua mangne laga hun bahut,
Jo ho sake to duaon ko be-asar kar de.

मैं ज़िन्दगी की दुआ मांगने लगा हूँ बहुत,
जो हो सके तो दुआओं को बे-असर कर दे !

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Baki hi kya raha tujhe mangne ke baad,
Bas ek dua mein chut gaye dua se hum.

बाकी ही क्या रहा तुझे मांगने के बाद,
बस एक दुआ में छूट गए दुआ से हम !

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Na jane kon si manzil pe ishq aa pahuncha,
Dua bhi kaam na aaye koi dawa na lage.

न जाने कौन सी मंज़िल पे इश्क़ आ पहुंचा,
दुआ भी काम न आये कोई दवा न लगे !

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Manga kareinge ab se dua hijr-e-yaar ki,
Aakhir to dushmani hai asar ko dua ke saath.

माँगा करेंगे अब से दुआ हिज्र-ए-यार की,
आख़िर तो दुश्मनी है असर को दुआ के साथ !

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Duayein yaad kara di gayi thi bachpan mein,
So zakhm khate rahe aur dua diye gaye hum.

दुआएँ याद करा दी गई थीं बचपन में,
सो ज़ख़्म खाते रहे और दुआ दिए गए हम !

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Is liye chal na saka koi bhi khanjar mujh par,
Meri shah-rag pe meri maa ki dua rakkhi thi.

इस लिए चल न सका कोई भी ख़ंजर मुझ पर,
मेरी शह-रग पे मेरी माँ की दुआ रक्खी थी !

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Jab lagen zakhm to qatil ko dua di jaye,
Hai yahi rasm to ye rasm utha di jaye.

जब लगें ज़ख़्म तो क़ातिल को दुआ दी जाए,
है यही रस्म तो ये रस्म उठा दी जाए !

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-Dua Shayari / Poetry/ Status / Quotes

 

Hum Se Bhaga Na Karo Dur Ghazalon Ki Tarah..

Hum Se Bhaga Na Karo Dur Ghazalon Ki Tarah..  Jan Nisar Akhtar Poetry

Hum se bhaga na karo dur ghazalon ki tarah,
Hum ne chaha hai tumhein chahne walon ki tarah.

Khud-ba-khud nind si aankhon mein ghuli jati hai,
Mahki mahki hai shab-e-gham tere baalon ki tarah.

Tere bin raat ke hathon pe ye taron ke ayagh,
Khub-surat hain magar zahar ke pyalon ki tarah.

Aur kya is se ziyaada koi narmi bartun,
Dil ke zakhmon ko chhua hai tere galon ki tarah.

Gungunate hue aur aa kabhi un sinon mein,
Teri khatir jo mahakte hain shiwalon ki tarah.

Teri zulfen teri aankhen tere abru tere lab,
Ab bhi mashhur hain duniya mein misalon ki tarah.

Hum se mayus na ho aye shab-e-dauran ki abhi,
Dil mein kuch dard chamakte hain ujalon ki tarah.

Mujh se nazren to milao ki hazaron chehre,
Meri aankhon mein sulagte hain sawalon ki tarah.

Aur to mujh ko mila kya meri mehnat ka sila,
Chand sikke hain mere hath mein chhaalon ki tarah.

Justuju ne kisi manzil pe thaharne na diya,
Hum bhatakte rahe aawara khayalon ki tarah.

Zindagi jis ko tera pyar mila wo jaane,
Hum to nakaam rahe chahne walon ki tarah. !!

Hum Se Bhaga Na Karo Dur Ghazalon Ki Tarah..  Jan Nisar Akhtar Poetry In Hindi Language

हम से भागा न करो दूर ग़ज़ालों की तरह,
हम ने चाहा है तुम्हें चाहने वालों की तरह !

ख़ुद-ब-ख़ुद नींद सी आँखों में घुली जाती है,
महकी महकी है शब-ए-ग़म तेरे बालों की तरह !

तेरे बिन रात के हाथों पे ये तारों के अयाग़,
ख़ूब-सूरत हैं मगर ज़हर के प्यालों की तरह !

और क्या इस से ज़ियादा कोई नरमी बरतूँ,
दिल के ज़ख़्मों को छुआ है तेरे गालों की तरह !

गुनगुनाते हुए और आ कभी उन सीनों में,
तेरी ख़ातिर जो महकते हैं शिवालों की तरह !

तेरी ज़ुल्फ़ें तेरी आँखें तेरे अबरू तेरे लब,
अब भी मशहूर हैं दुनिया में मिसालों की तरह !

हम से मायूस न हो ऐ शब-ए-दौराँ कि अभी,
दिल में कुछ दर्द चमकते हैं उजालों की तरह !

मुझ से नज़रें तो मिलाओ कि हज़ारों चेहरे,
मेरी आँखों में सुलगते हैं सवालों की तरह !

और तो मुझ को मिला क्या मेरी मेहनत का सिला,
चंद सिक्के हैं मेरे हाथ में छालों की तरह !

जुस्तुजू ने किसी मंज़िल पे ठहरने न दिया,
हम भटकते रहे आवारा ख़यालों की तरह !

ज़िंदगी जिस को तेरा प्यार मिला वो जाने,
हम तो नाकाम रहे चाहने वालों की तरह !!

-Jan Nisar Akhtar Ghazal / Urdu Poetry

 

Halqe Nahi Hain Zulf Ke Halqe Hain Jal Ke

Halqe nahi hain zulf ke halqe hain jal ke,
Han aye nigah-e-shauq zara dekh-bhaal ke.

Pahunche hain ta-kamar jo tere gesu-e-rasa,
Mani ye hain kamar bhi barabar hai baal ke.

Bos-o-kanar-o-wasl-e-hasinan hai khub shaghl,
Kamtar buzurg honge khilaf is khayal ke.

Qamat se tere sane-e-qudrat ne aye hasin,
Dikhla diya hai hashr ko sanche mein dhaal ke.

Shan-e-dimagh ishq ke jalwe se ye badhi,
Rakhta hai hosh bhi qadam apne sambhaal ke.

Zinat muqaddama hai musibat ka dahr mein,
Sab shama ko jalate hain sanche mein dhaal ke.

Hasti ke haq ke samne kya asl-e-in-o-an,
Putle ye sab hain aap ke wahm-o-khayal ke.

Talwar le ke uthta hai har talib-e-farogh,
Daur-e-falak mein hain ye ishaare hilal ke.

Pechida zindagi ke karo tum muqaddame,
Dikhla hi degi maut natija nikal ke. !!

-Akbar Allahabadi Ghazal / Urdu Poetry

 

Jab Bachpan Tha Toh Jawaani Ek Khwaab Tha..

Jab Bachpan Tha Toh Jawaani Ek Khwaab Tha

Jab Bachpan Tha Toh Jawaani Ek Khwaab Tha – Heart Touching Poetry !

Jab Bachpan Tha..
Toh Jawaani Ek Khwaab Tha..
Jab Jawaan Huye..
Toh Bachpan Ek Zamana Tha..

Jab Ghar Mein Rahte The..
Aazadi Achchi Lagti Thi..
Aaj Aazadi Hai..
Phir Bhi Ghar Jane Ki Jaldi Rehti Hai..

Kabhi Hotel Mein Jana..
Pizza, Burger Khaana Pasand Tha..
Aaj Ghar Per Aana..
Aur Maa Ke Haath Ka Khaana Pasand Hai..

School Mein Jinke Saath Jhagarte The..
Aaj Unko Hi Internet Pe Talaashte Hain..

Khushi Kis Mein Hoti Hai..
Ye Pata Ab Chala Hai..
Bachpan Kya tha..
Iska Ehsaas Ab Hua Hai..

Kash Tabdil Kar Sakte Hum Zindagi Ke Kuch Saal..
Kash Ji Sakte Hum..
Zindagi Bharpur Phir Ek Baar..

Jab Apne Shirt Mein Haath Chupate The..
Aur Logon Se Kehte Phirte The..
Dekho..
Maine Apne Haath Jaadu Se Ghayab Kar Diye..

Jab Humare Paas..
Chaar Rangon Se Likhne Wali Ek Qalam Hua Karti Thi..
Aur Hum Sab Ke Button Ko..
Ek Saath Dabane Ki Koshish Kiya Karte The..

Jab Hum Darwaze Ke Piche Chupte The..
Taaki Agar Koi Aaye..
Toh Usse Daraa Sakein..

Jab Aankh Bandh Karke Sone Ka Drama Karte The..
Taaki Koi Humein God Mein Utha Ke..
Bistar Tak Pohncha De..

Socha Karte The..
Ke Ye Chaand Humari Cycle Ke Piche Piche..
Kyun Chal Raha hai..

Wall Switch Ko Darmiyan Mein Atkane Ki..
Koshish Kiya Karte The..

Phal Ke Beej Ko Is Khauf Se Nahi Khate The..
Ke Kahin Humare Pait Mein Darakht Na Ugg Jaye..

Saal Girah Sirf Is Wajah Se Manate The..
Taaki Dhaer Sare Tohfen Milen..

Fridge Aahista Se Bandh Kar Ke..
Ye Janne Ki Koshish Karte The..
Ke Uski Roshni Kab Bandh Hoti Hai..

Sach..
Bachpan Mein Sochte The..
Hum Bade Kyon Nahi Ho rahe..
Aur Ab Sochte Hain..
Hum Bade Kyon Ho Gaye..

Jab Bachpan Tha..
Toh Jawaani Ek Khwaab Tha..
Jab Jawaan Huye..
Toh Bachpan Ek Zamana Tha.. !!

Jab Bachpan Tha Toh Jawaani Ek Khwaab Tha – Heart Touching Poetry In Hindi Language !

जब बचपन था..
तो जवानी एक ख्वाब था..
जब जवान हुए..
तो बचपन एक ज़माना था..

जब घर में रहते थे..
आज़ादी अच्छी लगती थी..
आज आज़ादी है..
फिर भी घर जाने की जल्दी रहती है..

कभी होटल में जाना..
पिज़्ज़ा, बर्गर खाना पसंद था..
आज घर पर आना..
और माँ के हाथ का खाना पसंद है..

स्कूल में जिनके साथ झगड़ते थे..
आज उनको ही इंटरनेट पे तलाशते हैं..

खुशी किस में होती है..
ये पता अब चला है..
बचपन क्या था..
इसका एहसास अब हुआ है..

काश तब्दील कर सकते हम ज़िंदगी के कुछ साल..
काश जी सकते हम..
ज़िन्दगी भरपूर फिर एक बार..

जब अपने शर्ट में हाथ छुपाते थे..
और लोगों से कहते फिरते थे..
देखो..
मैंने अपने हाथ जादू से गायब कर दिए..

जब हमारे पास..
चार रंगों से लिखने वाली एक क़लाम हुआ करती थी..
और हम सब के बटन को..
एक साथ दबाने की कोशिश किया करते थे..

जब हम दरवाज़े के पीछे छुपते थे..
ताकि अगर कोई आये..
तो उससे डरा सकें..

जब आँख बंद करके सोने का ड्रामा करते थे..
ताकि कोई हमें गोद में उठा के..
बिस्तर तक पोहंचा दे..

सोचा करते थे..
के ये चाँद हमारी साइकिल के पीछे पीछे..
क्यों चल रहा है..

वाल स्विच को दरमियाँ में अटकने की..
कोशिश किया करते थे..

फल के बीज को इस खौफ से नहीं खाते थे..
के कहीं हमारे पेट में दरख्त न उग्ग जाये..

साल गिरह सिर्फ इस वजह से मनाते थे..
ताकि ढेर सारे तोहफे मिले..

फ्रिज आहिस्ता से बांध कर के..
ये जानने की कोशिश करते थे..
के उसकी रौशनी कब बांध होती है..

सच..
बचपन में सोचते थे..
हम बड़े क्यों नहीं हो रहे..
और अब सोचते हैं..
हम बड़े क्यों हो गए..

जब बचपन था..
तो जवानी एक ख्वाब था..
जब जवान हुए..
तो बचपन एक ज़माना था.. !!

Childhood Memories / बचपन की यादें शायरी

 

 

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Ummid Tuti Hui Hai Meri Jo Dil Mera Tha Wo Mar Chuka Hai

Ummid tuti hui hai meri jo dil mera tha wo mar chuka hai,
Jo zindagani ko talkh kar de wo waqt mujh par guzar chuka hai.

Agarche sine mein sans bhi hai nahi tabiat mein jaan baqi,
Ajal ko hai der ek nazar ki falak to kaam apna kar chuka hai.

Gharib-khane ki ye udasi ye na-durusti nahi qadimi,
Chahal pahal bhi kabhi yahan thi kabhi ye ghar bhi sanwar chuka hai.

Ye sina jis mein ye dagh mein ab masarraton ka kabhi tha makhzan,
Wo dil jo arman se bhara tha khushi se us mein thahar chuka hai.

Gharib “Akbar” ke gard kyun mein khayal waiz se koi kah de,
Use daraate ho maut se kya wo zindagi hi se dar chuka hai. !!

 

Dard To Maujud Hai Dil Mein Dawa Ho Ya Na Ho

Dard to maujud hai dil mein dawa ho ya na ho,
Bandagi haalat se zahir hai khuda ho ya na ho.

Jhumti hai shakh-e-gul khilte hain ghunche dam-ba-dam,
Ba-asar gulshan mein tahrik-e-saba ho ya na ho.

Wajd mein late hain mujh ko bulbulon ke zamzame,
Aap ke nazdik ba-mani sada ho ya na ho.

Kar diya hai zindagi ne bazm-e-hasti mein sharik,
Us ka kuch maqsud koi muddaa ho ya na ho.

Kyun ciwil-surgeon ka aana rokta hai ham-nashin,
Is mein hai ek baat honour ki shifa ho ya na ho.

Maulwi sahib na chhodenge khuda go bakhsh de,
Gher hi lenge police wale saza ho ya na ho.

Membari se aap par to warnish ho jayegi,
Qaum ki haalat mein kuch is se jila ho ya na ho.

Motariz kyun ho agar samjhe tumhein sayyaad dil,
Aaise gesu hun to shubah dam ka ho ya na ho. !!

दर्द तो मौजूद है दिल में दवा हो या न हो,
बंदगी हालत से ज़ाहिर है ख़ुदा हो या न हो !

झूमती है शाख़-ए-गुल खिलते हैं ग़ुंचे दम-ब-दम,
बा-असर गुलशन में तहरीक-ए-सबा हो या न हो !

वज्द में लाते हैं मुझ को बुलबुलों के ज़मज़मे,
आप के नज़दीक बा-मअनी सदा हो या न हो !

कर दिया है ज़िंदगी ने बज़्म-ए-हस्ती में शरीक,
उस का कुछ मक़्सूद कोई मुद्दआ हो या न हो !

क्यूँ सिवल-सर्जन का आना रोकता है हम-नशीं,
इस में है इक बात ऑनर की शिफ़ा हो या न हो !

मौलवी साहिब न छोड़ेंगे ख़ुदा गो बख़्श दे,
घेर ही लेंगे पुलिस वाले सज़ा हो या न हो !

मिमबरी से आप पर तो वार्निश हो जाएगी,
क़ौम की हालत में कुछ इस से जिला हो या न हो !

मोतरिज़ क्यूँ हो अगर समझे तुम्हें सय्याद दिल,
ऐसे गेसू हूँ तो शुबह दाम का हो या न हो !!

-Akbar Allahabadi Ghazal / Urdu Poetry

 

Dhup Mein Niklo Ghataon Mein Naha Kar Dekho

Dhup mein niklo ghataon mein naha kar dekho,
Zindagi kya hai kitabon ko hata kar dekho.

Sirf aankhon se hi duniya nahi dekhi jati,
Dil ki dhadkan ko bhi binai bana kar dekho.

Pattharon mein bhi zaban hoti hai dil hote hain,
Apne ghar ke dar-o-diwar saja kar dekho.

Wo sitara hai chamakne do yunhi aankhon mein,
Kya zaruri hai use jism bana kar dekho.

Fasla nazron ka dhokha bhi to ho sakta hai,
Wo mile ya na mile hath badha kar dekho. !!

धूप में निकलो घटाओं में नहा कर देखो,
ज़िंदगी क्या है किताबों को हटा कर देखो !

सिर्फ़ आँखों से ही दुनिया नहीं देखी जाती,
दिल की धड़कन को भी बीनाई बना कर देखो !

पत्थरों में भी ज़बाँ होती है दिल होते हैं,
अपने घर के दर-ओ-दीवार सजा कर देखो !

वो सितारा है चमकने दो यूँही आँखों में,
क्या ज़रूरी है उसे जिस्म बना कर देखो !

फ़ासला नज़रों का धोखा भी तो हो सकता है,
वो मिले या न मिले हाथ बढ़ा कर देखो !!

-Nida Fazli Ghazal / Safar Shayari

 

Safar Mein Dhup To Hogi Jo Chal Sako To Chalo

Safar mein dhup to hogi jo chal sako to chalo,
Sabhi hain bhid mein tum bhi nikal sako to chalo.

Kisi ke waste rahen kahan badalti hain,
Tum apne aap ko khud hi badal sako to chalo.

Yahan kisi ko koi rasta nahi deta,
Mujhe gira ke agar tum sambhal sako to chalo.

Kahin nahi koi suraj dhuan dhuan hai faza,
Khud apne aap se bahar nikal sako to chalo.

Yahi hai zindagi kuch khwab chand ummiden,
Inhin khilaunon se tum bhi bahal sako to chalo. !!

सफ़र में धूप तो होगी जो चल सको तो चलो,
सभी हैं भीड़ में तुम भी निकल सको तो चलो !

किसी के वास्ते राहें कहाँ बदलती हैं,
तुम अपने आप को ख़ुद ही बदल सको तो चलो !

यहाँ किसी को कोई रास्ता नहीं देता,
मुझे गिरा के अगर तुम सँभल सको तो चलो !

कहीं नहीं कोई सूरज धुआँ धुआँ है फ़ज़ा,
ख़ुद अपने आप से बाहर निकल सको तो चलो !

यही है ज़िंदगी कुछ ख़्वाब चंद उम्मीदें,
इन्हीं खिलौनों से तुम भी बहल सको तो चलो !!

-Nida Fazli Ghazal / Safar Shayari

 

Jab Se Kareeb Hoke Chale Zindagi Se Hum

Jab se kareeb hoke chale zindagi se hum,
Khud apne aaine ko lage ajnabi se hum.

Kuch dur chal ke raste sab ek se lage,
Milne gaye kisi se mil aaye kisi se hum.

Achchhe bure ke farq ne basti ujad di,
Majbur ho ke milne lage har kisi se hum.

Shaista mahfilon ki fazaon mein zehar tha,
Zinda bache hain zehn ki aawargi se hum.

Achchhi bhali thi duniya guzare ke waste,
Uljhe hue hain apni hi khud-agahi se hum.

Jangal mein dur tak koi dushman na koi dost,
Manus ho chale hain magar bambai se hum. !!

जब से क़रीब हो के चले ज़िंदगी से हम,
ख़ुद अपने आइने को लगे अजनबी से हम !

कुछ दूर चल के रास्ते सब एक से लगे,
मिलने गए किसी से मिल आए किसी से हम !

अच्छे बुरे के फ़र्क़ ने बस्ती उजाड़ दी,
मजबूर हो के मिलने लगे हर किसी से हम !

शाइस्ता महफ़िलों की फ़ज़ाओं में ज़हर था,
ज़िंदा बचे हैं ज़ेहन की आवारगी से हम !

अच्छी भली थी दुनिया गुज़ारे के वास्ते,
उलझे हुए हैं अपनी ही ख़ुद-आगही से हम !

जंगल में दूर तक कोई दुश्मन न कोई दोस्त,
मानूस हो चले हैं मगर बम्बई से हम !!

-Nida Fazli Sad Poetry/Ghazal

 

Ishq Hai To Ishq Ka Izhaar Hona Chahiye..

Ishq hai to ishq ka izhaar hona chahiye

Ishq hai to ishq ka izhaar hona chahiye,
Aap ko chehre se bhi bimar hona chahiye.

Aap dariya hain to is waqt hum khatre mein hain,
Aap kashti hain to hum ko paar hona chahiye.

Aire-gaire log bhi padhne lage hain in dino,
Aap ko aurat nahi akhbar hona chahiye.

Zindagi kab talak dar-dar phirayegi hamein,
Tuta phuta hi sahi ghar bar hona chahiye.

Apni yaadon se kaho ek din ki chhutti de mujhe.
Ishq ke hisse mein bhi itwaar hona chahiye. !!

आप को चेहरे से भी बीमार होना चाहिए,
इश्क़ है तो इश्क़ का इज़हार होना चाहिए !

आप दरिया हैं तो फिर इस वक़्त हम ख़तरे में हैं,
आप कश्ती हैं तो हम को पार होना चाहिए !

ऐरे-ग़ैरे लोग भी पढ़ने लगे हैं इन दिनों,
आप को औरत नहीं अख़बार होना चाहिए !

ज़िंदगी तू कब तलक दर-दर फिराएगी हमें,
टूटा-फूटा ही सही घर-बार होना चाहिए !

अपनी यादों से कहो इक दिन की छुट्टी दे मुझे,
इश्क़ के हिस्से में भी इतवार होना चाहिए !!

Munawwar Rana All Poetry, Ghazal, Ishq Shayari & Nazms Collection