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2 Line Dua Poetry In Hindi

2 Line Dua Poetry In HIndi

2 Line Dua Poetry In Hindi

2 Line Dua Poetry In Hindi बेहतरीन और चुनिंदा शायरी का संग्रह जो की दुआ शब्द को बहुत ही शानदार तरीके से वर्णित करता है ! दुआ पर हिंदी के ये शेर, आपके प्यार और भावनाओं को वक़्त करने में आपकी मदद कर सकते हैं ! यहाँ आप हर तरह की शायरी को पढ़ सकते है और अपने चाहने वालों को शेरे कर सकते हैं !

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Famous Dua Poetry In Hindi.

Auron ki burai na dekhun wo nazar de,
Haan apni burai ko parakhne ka hunar de.

औरों की बुराई को न देखूँ वो नज़र दे,
हाँ अपनी बुराई को परखने का हुनर दे !

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Main kya karun mere qatil na chahne par bhi,
Tere liye mere dil se dua niklati hai.

मैं क्या करूँ मेरे क़ातिल न चाहने पर भी,
तेरे लिए मेरे दिल से दुआ निकलती है !

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Abhi raah mein kai mod hain koi aayega koi jayega,
Tumein jis ne dil se bhula diya usse bhulne ki dua karo.

अभी राह में कई मोड़ हैं कोई आएगा कोई जायेगा,
तुम्हें जिस ने दिल से भुला दिया उसे भूलने की दुआ करो !

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Aakhir dua karein bhi to kis mudda ke saath,
Kaise zmeen ki baat kahein aasman se hum.

आखिर दुआ करें भी तो किस मुद्दे के साथ,
कैसे ज़मीन की बात कहें आसमान से हम !

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Abhi jinda hai maa meri mujhe kuch bhi nahi hoga,
Main ghar se jab nikalta hun dua bhi saath chalti hain.

अभी ज़िंदा है माँ मेरी मुझे कुछ भी नहीं होगा,
मैं घर से जब निकलता हूँ दुआ भी साथ चलती हैं !

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Dua ko haath uthate huye larjta hun,
Kabhi dua nahi mangi thi maa ke hote huye.

दुआ को हाथ उठाते हुए लरजता हूँ,
कभी दुआ नहीं मांगी थी माँ के होते हुए !

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Jab bhi kashti meri selaab mein aa jati hai,
Maa dua karti huyi khwaab mein aa jati hai.

जब भी कश्ती मेरी सैलाब में आ जाती है,
माँ दुआ करती हुई ख्वाब में आ जाती है !

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Jate ho khuda hafeez haan itni guzarish hai,
Jab yaad hum aa jayein milne ki dua karna.

जाते हो ख़ुदा हाफ़िज़ हाँ इतनी गुज़ारिश है,
जब याद हम आ जाएं मिलने की दुआ करना !

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Kyun mang rahe ho kisi baarish ki duayein,
Tum apne shiksta dar-o-deewar to dekho.

क्यों मांग रहे हो किसी बारिश की दुआएं,
तुम अपने शिकस्ता दर-ओ-दीवार तो देखो !

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Mang lun tujhse tujhi ko ki sabhi kuch mil jaye,
Sau sawalon se yahi ek sawal achcha hai.

मांग लूं तुझसे तुझी को की सभी कुछ मिल जाये,
सौ सवालों से यही एक सवाल अच्छा है !

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Mujhe zindagi ki dua dene wale,
Hansi aa rahi hai teri sadgi par.

मुझे ज़िन्दगी की दुआ देने वाले,
हंसी आ रही है तेरी सादगी पर !

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Koi charaah nahi dua ke siwa,
Koi suna nahi khuda ke siwa.

कोई चराह नहीं दुआ के सिवा,
कोई सुना नहीं खुदा के सिवा !

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Hazar bar jo manga karo kya hasil,
Dua wahi hai jo dil se kabhi nikalti hai.

हज़ार बार जो माँगा करो क्या हासिल,
दुआ वही है जो दिल से कभी निकलती है !

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Dua karo ki ye paudha hara hi lage,
Udasiyon mein bhi chehra khila hi lage.

दुआ करो कि ये पौधा हरा ही लगे,
उदासियों में भी चेहरा खिला ही लगे !

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Dua karo ki main us ke liye dua ho jaun,
Wo ek shakhas jo dil ko dua sa lagta hai.

दुआ करो कि मैं उस के लिए दुआ हो जाऊं,
वो एक शख्स जो दिल को दुआ सा लगता है !

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Mangi thi ek bar dua hum ne maut ki,
Sharminda aaj tak hain miyan zindagi se hum.

मांगी थी एक बार दुआ हम ने मौत की,
शर्मिंदा आज तक हैं मियां ज़िन्दगी से हम !

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Marz-e-ishq jise ho usse kya yaad rahe,
Na dawa yaad rahe aur na dua yaad rahe.

मर्ज़-ए-इश्क़ जिसे हो उससे क्या याद रहे,
न दवा याद रहे और न दुआ याद रहे !

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Maine din raat khuda se ye dua mangi thi,
Koi aahat na ho dar par mere jab tu aaye.

मैंने दिन रात खुदा से ये दुआ मांगी थी,
कोई आहट ना हो दर पर मेरे जब तू आये !

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Dur rahti hain sada un se balayein sahil,
Apne maa-baap ki jo roz dua lete hain.

दूर रहती हैं सदा उन से बलायें साहिल,
अपने माँ-बाप की जो रोज़ दुआ लेते हैं !

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Kisi ne chum ke aankhon ko ye dua di thi,
Zameen teri khuda motiyon se num kar de.

किसी ने चुम के आँखों को ये दुआ दी थी,
ज़मीन तेरी खुदा मोतियों से नुम कर दे !

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Tu salamat raho qayamat tak,
Aur qayamat kabhi na aaye “Shad”.

तू सलामत रहो क़यामत तक,
और क़यामत कभी न आये “शाद” !

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Wo bada rahim o qareem hai mujhe ye sifat bhi ataa kare,
Tujhe bhulne ki dua karun to meri dua mein asar na ho.

वो बड़ा रहीम ओ करीम है मुझे ये सिफ़त भी अता करे,
तुझे भूलने की दुआ करूँ तो मेरी दुआ में असर न हो !

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Ye bastiyan hai ki maqlat dua kiye jaye,
Dua ke din hai musalsal dua kiye jaye.

ये बस्तियां है की मकलत दुआ किये जाये,
दुआ के दिन है मुसलसल दुआ किये जाये !

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Wo sarkhushi de ki zindagi ko sharaab se bahar yaab kar de,
Mere khayalon mein rang bhar mere lahu ko sharaab kar de.

वो सरखुशी दे की ज़िन्दगी को शराब से बाहर याब कर दे,
मेरे ख्यालों में रंग भर मेरे लहू को शराब कर दे !

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Jaban pe shikwa-e-mehri-e-khuda kyun hai,
Dua to mangiye “Aatish” kabhi dua ki tarah.

जबान पे शिकवा-ए-मेहरी-ए-खुदा क्यों है,
दुआ तो मांगिये “आतिश” कभी दुआ की तरह !

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Hijr ki shab nala-e-dil wo sada dene lage,
Sunane wale raat ktne ki dua dene lage.

हिज्र की शब् नाला-ए-दिल वो सदा देने लगे,
सुनने वाले रात कटने की दुआ देने लगे !

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Kya-kya duayein mangte hain sab magar “asar”,
Apni yahi dua hai koi mudda na ho.

क्या-क्या दुआएं मांगते हैं सब मगर “असर”,
अपनी यही दुआ है कोई मुद्दा न हो !

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Sahraa ka safar tha to shajar kyun nahi aaya,
Mangi thi duayein to asar kyun nahi aaya.

सहरा का सफर था तो शजर क्यों नहीं आया,
मांगी थी दुआयें तो असर क्यों नहीं आया !

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Dekh kar tul-e-shab-e-hijr dua karta hun,
Wasl ke roz se bhi umar meri kam ho jaye.

देख कर तूल-ए-शब्-ए-हिज्र दुआ करता हूँ,
वस्ल के रोज़ से भी उम्र मेरी कम हो जाये !

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Raah ka sajar hun main aur ek musafir tu,
De koi dua mujh ko le koi dua mujh se.

राह का सजर हूँ मैं और एक मुसाफिर तू,
दे कोई दुआ मुझ को ले कोई दुआ मुझ से !

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Bhul hi jayein hum ko ye to na ho,
Log mere liye dua na karein.

भूल ही जाएं हम को ये तो न हो,
लोग मेरे लिए दुआ न करें !

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Aate hain barg-o-baar darkhaton ke jism par,
Tum bhi uthao haath ki mausam dua ka hai.

आते हैं बर्ग-ओ-बार दरख़्तों के जिस्म पर,
तुम भी उठाओ हाथ कि मौसम दुआ का है !

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Na charagar ki jrurat na kuch dawa ki hai,
Dua ko haath uthao ki gham ki raat kate.

न चारागर की जरुरत न कुछ दवा की है,
दुआ को हाथ उठाओ की ग़म की रात कटे !

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Dushman-e-jaan hi sahi dost samjata hun usse,
Bad-dua jis ki mujhe ban ke dua lagti hai.

दुश्मन-ए-जाँ ही सही दोस्त समझता हूँ उसे,
बद-दुआ जिस की मुझे बन के दुआ लगती है !

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Kaun deta hai mohabbat ko parstish ka maqam,
Tum ye insaaf se socho to dua do hum ko.

कौन देता है मोहब्बत को परस्तिश का मक़ाम,
तुम ये इन्साफ से सोचो तो दुआ दो हम को !

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Us marz ko marz-e-ishq kaha karte hain,
Na dawa hoti hai jis ki na dua hoti hai.

उस मरज़ को मरज़-ए-इश्क़ कहा करते हैं,
न दवा होती है जिस की न दुआ होती है !

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Zameen ko aye khuda wo jaljala de,
Nishan tak sarhdon ke jo mita de.

ज़मीं को ऐ ख़ुदा वो ज़लज़ला दे,
निशाँ तक सरहदों के जो मिटा दे !

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Ek teri tamana ne kuch yesa nawaza hai,
Mangi hi nahi jati ab koi dua hum se.

एक तेरी तमन्ना ने कुछ ऐसा नवाज़ा है,
माँगी ही नहीं जाती अब कोई दुआ हम से !

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Maut mangi thi khudai to nahi mangi thi,
Le dua kar chuke ab tark-e-dua karte hain.

मौत माँगी थी ख़ुदाई तो नहीं माँगी थी,
ले दुआ कर चुके अब तर्क-ए-दुआ करते हैं !

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Haye koi dawa karo haye koi dua karo,
Haye jigar mein dard hai haye jigar ka kya karun.

हाए कोई दवा करो हाए कोई दुआ करो,
हाए जिगर में दर्द है हाए जिगर का क्या करूँ !

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Us dushman-e-wafa ko dua de raha hun main,
Mera na ho saka wo kisi ka to ho gaya.

उस दुश्मन-ए-वफ़ा को दुआ दे रहा हूँ मैं,
मेरा न हो सका वो किसी का तो हो गया !

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Gham-e-dil ab kisi ke bas ka nahi,
Kya dawa kya dua kare koi.

ग़म-ए-दिल अब किसी के बस का नहीं,
क्या दवा क्या दुआ करे कोई !

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Ye mozja bhi kisi ki dua ka lagta hai
Ye shehar ab bhi usi bewafa ka lagta hai.

ये मोजज़ा भी किसी की दुआ का लगता है,
ये शहर अब भी उसी बे-वफ़ा का लगता है !

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Buland haathon mein zanjir dal dete hain,
Ajib rasm chali hai dua na mange koi.

बुलंद हाथों में जंजीर डाल देते हैं,
अजीब रस्म चली है दुआ ना मांगे कोई !

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Ye iltija dua ye tamana fuzul hai,
Sukhi nadi ke paas samundar na jayega.

ये इल्तिजा दुआ ये तमना फ़ुज़ूल है,
सूखी नदी के पास समुन्दर न जायेगा !

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Koi to phool khilaye dua ke lahze mein,
Ajab trah ki ghutan hai hawa ke lahze mein.

कोई तो फूल खिलाए दुआ के लहज़े में,
अजब तरह की घुटन है हवा के लहज़े में !

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Main zindagi ki dua mangne laga hun bahut,
Jo ho sake to duaon ko be-asar kar de.

मैं ज़िन्दगी की दुआ मांगने लगा हूँ बहुत,
जो हो सके तो दुआओं को बे-असर कर दे !

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Baki hi kya raha tujhe mangne ke baad,
Bas ek dua mein chut gaye dua se hum.

बाकी ही क्या रहा तुझे मांगने के बाद,
बस एक दुआ में छूट गए दुआ से हम !

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Na jane kon si manzil pe ishq aa pahuncha,
Dua bhi kaam na aaye koi dawa na lage.

न जाने कौन सी मंज़िल पे इश्क़ आ पहुंचा,
दुआ भी काम न आये कोई दवा न लगे !

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Manga kareinge ab se dua hijr-e-yaar ki,
Aakhir to dushmani hai asar ko dua ke saath.

माँगा करेंगे अब से दुआ हिज्र-ए-यार की,
आख़िर तो दुश्मनी है असर को दुआ के साथ !

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Duayein yaad kara di gayi thi bachpan mein,
So zakhm khate rahe aur dua diye gaye hum.

दुआएँ याद करा दी गई थीं बचपन में,
सो ज़ख़्म खाते रहे और दुआ दिए गए हम !

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Is liye chal na saka koi bhi khanjar mujh par,
Meri shah-rag pe meri maa ki dua rakkhi thi.

इस लिए चल न सका कोई भी ख़ंजर मुझ पर,
मेरी शह-रग पे मेरी माँ की दुआ रक्खी थी !

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Jab lagen zakhm to qatil ko dua di jaye,
Hai yahi rasm to ye rasm utha di jaye.

जब लगें ज़ख़्म तो क़ातिल को दुआ दी जाए,
है यही रस्म तो ये रस्म उठा दी जाए !

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-Dua Shayari / Poetry/ Status / Quotes

 

Kahan Wo Ab Lutf-E-Bahami Hai Mohabbaton Mein Bahut Kami Hai

Kahan wo ab lutf-e-bahami hai mohabbaton mein bahut kami hai,
Chali hai kaisi hawa ilahi ki har tabiat mein barhami hai.

Meri wafa mein hai kya tazalzul meri itaat mein kya kami hai,
Ye kyun nigahen phiri hain mujh se mizaj mein kyun ye barhami hai.

Wahi hai fazl-e-khuda se ab tak taraqqi-e-kar-e-husn o ulfat,
Na wo hain mashq-e-sitam mein qasir na khun-e-dil ki yahan kami hai.

Ajib jalwe hain hosh dushman ki wahm ke bhi qadam ruke hain,
Ajib manzar hain hairat-afza nazar jahan thi wahin thami hai.

Na koi takrim-e-bahami hai na pyar baqi hai ab dilon mein,
Ye sirf tahrir mein dear sir hai ya janab-e-mukarrami hai.

Kahan ke muslim kahan ke hindu bhulai hain sab ne agli rasmen,
Aqide sab ke hain tin-terah na gyarahwin hai na ashtami hai.

Nazar meri aur hi taraf hai hazar rang-e-zamana badle,
Hazar baaten banaye naseh jami hai dil mein jo kuch jami hai.

Agarche main rind-e-mohtaram hun magar ise shaikh se na puchho,
Ki un ke aage to is zamane mein sari duniya jahannami hai. !!

-Akbar Allahabadi Ghazal / Urdu Poetry

 

Teri Zulfon Mein Dil Uljha Hua Hai

Teri zulfon mein dil uljha hua hai

 

Teri zulfon mein dil uljha hua hai,
Bala ke pech mein aaya hua hai.

Na kyunkar bu-e-khun name se aaye,
Usi jallad ka likkha hua hai.

Chale duniya se jis ki yaad mein hum,
Ghazab hai wo hamein bhula hua hai.

Kahun kya haal agli ishraton ka,
Wo tha ek khwab jo bhula hua hai.

Jafa ho ya wafa hum sab mein khush hain,
Karen kya ab to dil atka hua hai.

Hui hai ishq hi se husn ki qadr,
Hamin se aap ka shohra hua hai.

Buton par rahti hai mail hamesha,
Tabiat ko khudaya kya hua hai.

Pareshan rahte ho din raat “Akbar“,
Ye kis ki zulf ka sauda hua hai. !!

तेरी ज़ुल्फ़ों में दिल उलझा हुआ है,
बला के पेच में आया हुआ है !

न क्यूँकर बू-ए-ख़ूँ नामे से आए,
उसी जल्लाद का लिक्खा हुआ है !

चले दुनिया से जिस की याद में हम,
ग़ज़ब है वो हमें भूला हुआ है !

कहूँ क्या हाल अगली इशरतों का,
वो था इक ख़्वाब जो भूला हुआ है !

जफ़ा हो या वफ़ा हम सब में ख़ुश हैं,
करें क्या अब तो दिल अटका हुआ है !

हुई है इश्क़ ही से हुस्न की क़द्र,
हमीं से आप का शोहरा हुआ है !

बुतों पर रहती है माइल हमेशा,
तबीअत को ख़ुदाया क्या हुआ है !

परेशाँ रहते हो दिन रात “अकबर“,
ये किस की ज़ुल्फ़ का सौदा हुआ है !!

 

Phir Gayi Aap Ki Do Din Mein Tabiat Kaisi

Phir gayi aap ki do din mein tabiat kaisi,
Ye wafa kaisi thi sahab ye murawwat kaisi,

Dost ahbab se hans bol ke kat jayegi raat,
Rind-e-azad hain hum ko shab-e-furqat kaisi.

Jis hasin se hui ulfat wahi mashuq apna,
Ishq kis cheez ko kahte hain tabiat kaisi.

Hai jo qismat mein wahi hoga na kuch kam na siwa,
Aarzu kahte hain kis cheez ko hasrat kaisi.

Haal khulta nahi kuch dil ke dhadakne ka mujhe,
Aaj rah rah ke bhar aati hai tabiat kaisi.

Kucha-e-yaar mein jata to nazara karta,
Qais aawara hai jangal mein ye wahshat kaisi. !!

फिर गई आप की दो दिन में तबीयत कैसी,
ये वफ़ा कैसी थी साहब ! ये मुरव्वत कैसी !

दोस्त अहबाब से हंस बोल के कट जायेगी रात,
रिंद-ए-आज़ाद हैं, हमको शब-ए-फुरक़त कैसी !

जिस हसीं से हुई उल्फ़त वही माशूक़ अपना,
इश्क़ किस चीज़ को कहते हैं, तबीयत कैसी !

है जो किस्मत में वही होगा न कुछ कम, न सिवा,
आरज़ू कहते हैं किस चीज़ को, हसरत कैसी !

हाल खुलता नहीं कुछ दिल के धड़कने का मुझे,
आज रह रह के भर आती है तबीयत कैसी !

कूचा-ए-यार में जाता तो नज़ारा करता,
क़ैस आवारा है जंगल में, ये वहशत कैसी !!

-Akbar Allahabadi Ghazal / Urdu Poetry

 

Dil-E-Nadan Tujhe Hua Kya Hai..

Dil-e-nadan tujhe hua kya hai

 

Dil-e-nadan tujhe hua kya hai,
Aakhir is dard ki dawa kya hai.

Hum hain mushtaq aur wo bezar,
Ya ilahi ye majra kya hai.

Main bhi munh mein zaban rakhta hun,
Kash puchho ki muddaa kya hai.

Jab ki tujh bin nahi koi maujud,
Phir ye hangama aye khuda kya hai.

Ye pari chehra log kaise hain,
Ghamza o ishwa o ada kya hai.

Shikan-e-zulf-e-ambarin kyun hai,
Nigah-e-chashm-e-surma sa kya hai.

Sabza o gul kahan se aaye hain,
Abr kya chiz hai hawa kya hai.

Hum ko un se wafa ki hai ummid,
Jo nahi jaante wafa kya hai.

Han bhala kar tera bhala hoga,
Aur darwesh ki sada kya hai.

Jaan tum par nisar karta hun,
Main nahi jaanta dua kya hai.

Main ne mana ki kuch nahi “Ghalib
Muft hath aaye to bura kya hai. !!

दिल-ए-नादाँ तुझे हुआ क्या है,
आख़िर इस दर्द की दवा क्या है !

हम हैं मुश्ताक़ और वो बेज़ार,
या इलाही ये माजरा क्या है !

मैं भी मुँह में ज़बान रखता हूँ,
काश पूछो कि मुद्दा क्या है !

जब कि तुझ बिन नहीं कोई मौजूद,
फिर ये हंगामा ऐ ख़ुदा क्या है !

ये परी-चेहरा लोग कैसे हैं,
ग़म्ज़ा ओ इश्वा ओ अदा क्या है !

शिकन-ए-ज़ुल्फ़-ए-अंबरीं क्यूँ है,
निगह-ए-चश्म-ए-सुरमा सा क्या है !

सब्ज़ा ओ गुल कहाँ से आए हैं,
अब्र क्या चीज़ है हवा क्या है !

हम को उन से वफ़ा की है उम्मीद,
जो नहीं जानते वफ़ा क्या है !

हाँ भला कर तेरा भला होगा,
और दरवेश की सदा क्या है !

जान तुम पर निसार करता हूँ,
मैं नहीं जानता दुआ क्या है !

मैं ने माना कि कुछ नहीं ‘ग़ालिब‘,
मुफ़्त हाथ आए तो बुरा क्या है !!

– मिर्ज़ा ग़ालिब

 

Ye Kya Tilism Hai Duniya Pe Bar Guzri Hai

Ye kya tilism hai duniya pe bar guzri hai,
Wo zindagi jo sar-e-rahguzar guzri hai.

Gulon ki gum-shudagi se suragh milta hai,
Kahin chaman se nasim-e-bahaar guzri hai.

Kahin sahar ka ujala hua hai ham-nafaso,
Ki mauj-e-barq sar-e-shakh-sar guzri hai.

Raha hai ye sar-e-shorida misl-e-shola buland,
Agarche mujh pe qayamat hazar guzri hai.

Ye hadisa bhi hua hai ki ishq-e-yar ki yaad,
Dayar-e-qalb se begana-war guzri hai.

Unhin ko arz-e-wafa ka tha ishtiyaq bahut,
Unhin ko arz-e-wafa na-gawar guzri hai.

Harim-e-shauq mahakta hai aaj tak “Abid“,
Yahan se nikhat-e-gesu-e-yar guzri hai. !!

ये क्या तिलिस्म है दुनिया पे बार गुज़री है,
वो ज़िंदगी जो सर-ए-रहगुज़ार गुज़री है !

गुलों की गुम-शुदगी से सुराग़ मिलता है,
कहीं चमन से नसीम-ए-बहार गुज़री है !

कहीं सहर का उजाला हुआ है हम-नफ़सो,
कि मौज-ए-बर्क़ सर-ए-शाख़-सार गुज़री है !

रहा है ये सर-ए-शोरीदा मिस्ल-ए-शोला बुलंद,
अगरचे मुझ पे क़यामत हज़ार गुज़री है !

ये हादिसा भी हुआ है कि इश्क़-ए-यार की याद,
दयार-ए-क़ल्ब से बेगाना-वार गुज़री है !

उन्हीं को अर्ज़-ए-वफ़ा का था इश्तियाक़ बहुत,
उन्हीं को अर्ज़-ए-वफ़ा ना-गवार गुज़री है !

हरीम-ए-शौक़ महकता है आज तक “आबिद“,
यहाँ से निकहत-ए-गेसू-ए-यार गुज़री है !!

 

Apna Dil Pesh Karun Apni Wafa Pesh Karun..

Apna dil pesh karun apni wafa pesh karun,
Kuch samajh mein nahi aata tujhe kya pesh karun.

Tere milne ki khushi mein koi naghma chhedoon,
Ya tere dard-e-judai ka gila pesh karun.

Mere khwabon mein bhi tu mere khayalon mein bhi tu,
Kaun si chiz tujhe tujh se juda pesh karun.

Jo tere dil ko lubhaye wo ada mujh mein nahi,
Kyun na tujh ko koi teri hi ada pesh karun. !!

अपना दिल पेश करूँ अपनी वफ़ा पेश करूँ,
कुछ समझ में नहीं आता तुझे क्या पेश करूँ !

तेरे मिलने की ख़ुशी में कोई नग़्मा छेड़ूँ,
या तेरे दर्द-ए-जुदाई का गिला पेश करूँ !

मेरे ख़्वाबों में भी तू मेरे ख़यालों में भी तू,
कौन सी चीज़ तुझे तुझ से जुदा पेश करूँ !

जो तेरे दिल को लुभाए वो अदा मुझ में नहीं,
क्यूँ न तुझ को कोई तेरी ही अदा पेश करूँ !!

 

Barbaad-E-Mohabbat Ki Dua Sath Liye Ja..

Barbaad-e-mohabbat ki dua sath liye ja,
Tuta hua iqrar-e-wafa sath liye ja.

Ek dil tha jo pahle hi tujhe saunp diya tha,
Ye jaan bhi aye jaan-e-ada sath liye ja.

Tapti hui rahon se tujhe aanch na pahunche,
Diwanon ke ashkon ki ghata sath liye ja.

Shamil hai mera khun-e-jigar teri hina mein,
Ye kam ho to ab khun-e-wafa sath liye ja.

Hum jurm-e-mohabbat ki saza payenge tanha,
Jo tujh se hui ho wo khata sath liye ja. !!

बरबाद-ए-मोहब्बत की दुआ साथ लिए जा,
टूटा हुआ इक़रार-ए-वफ़ा साथ लिए जा !

एक दिल था जो पहले ही तुझे सौंप दिया था,
ये जान भी ऐ जान-ए-अदा साथ लिए जा !

तपती हुई राहों से तुझे आँच न पहुँचे,
दीवानों के अश्कों की घटा साथ लिए जा !

शामिल है मेरा ख़ून-ए-जिगर तेरी हिना में,
ये कम हो तो अब ख़ून-ए-वफ़ा साथ लिए जा !

हम जुर्म-ए-मोहब्बत की सज़ा पाएँगे तन्हा,
जो तुझ से हुई हो वो ख़ता साथ लिए जा !!

 

Aisa Bana Diya Tujhe Qudrat Khuda Ki Hai..

Aisa bana diya tujhe qudrat khuda ki hai,
Kis husan ka hai husan ada kis ada ki hai.

Chashm-e-siyah-e-yaar se sazish haya ki hai,
Laila ke sath mein ye saheli bala ki hai.

Taswir kyun dikhayen tumhein naam kyun batayen,
Laye hain hum kahin se kisi bewafa ki hai.

Andaz mujh se aur hain dushman se aur dhang,
Pahchan mujh ko apni parai qaza ki hai.

Maghrur kyun hain aap jawani par is qadar,
Ye mere naam ki hai ye meri dua ki hai.

Dushman ke ghar se chal ke dikha do juda juda,
Ye bankpan ki chaal ye naz-o-ada ki hai.

Rah rah ke le rahi hai mere dil mein chutkiyan,
Phisli hui girah tere band-e-qaba ki hai.

Gardan mudi nigah ladi baat kuchh na ki,
Shokhi to khair aap ki tamkin bala ki hai.

Hoti hai roz baada-kashon ki dua qubul,
Aye mohtasib ye shan-e-karimi khuda ki hai.

Jitne gile the un ke wo sab dil se dhul gaye,
Jhepi hui nigah talafi jafa ki hai.

Chhupta hai khun bhi kahin mutthi to kholiye,
Rangat yahi hina ki yahi bu hina ki hai.

Kah do ki be-wazu na chhuye us ko mohtasib,
Botal mein band ruh kisi parsa ki hai.

Main imtihan de ke unhen kyun na mar gaya,
Ab ghair se bhi un ko tamanna wafa ki hai.

Dekho to ja ke hazrat-e-‘Bekhud’ na hun kahin,
Dawat sharab-khane mein ek parsa ki hai. !!

ऐसा बना दिया तुझे क़ुदरत ख़ुदा की है,
किस हुस्न का है हुस्न अदा किस अदा की है !

चश्म-ए-सियाह-ए-यार से साज़िश हया की है,
लैला के साथ में ये सहेली बला की है !

तस्वीर क्यूँ दिखाएँ तुम्हें नाम क्यूँ बताएँ,
लाए हैं हम कहीं से किसी बेवफ़ा की है !

अंदाज़ मुझ से और हैं दुश्मन से और ढंग,
पहचान मुझ को अपनी पराई क़ज़ा की है !

मग़रूर क्यूँ हैं आप जवानी पर इस क़दर,
ये मेरे नाम की है ये मेरी दुआ की है !

दुश्मन के घर से चल के दिखा दो जुदा जुदा,
ये बाँकपन की चाल ये नाज़-ओ-अदा की है !

रह रह के ले रही है मिरे दिल में चुटकियाँ,
फिसली हुई गिरह तिरे बंद-ए-क़बा की है !

गर्दन मुड़ी निगाह लड़ी बात कुछ न की,
शोख़ी तो ख़ैर आप की तम्कीं बला की है !

होती है रोज़ बादा-कशों की दुआ क़ुबूल,
ऐ मोहतसिब ये शान-ए-करीमी ख़ुदा की है !

जितने गिले थे उन के वो सब दिल से धुल गए,
झेपी हुई निगाह तलाफ़ी जफ़ा की है !

छुपता है ख़ून भी कहीं मुट्ठी तो खोलिए,
रंगत यही हिना की यही बू हिना की है !

कह दो कि बे-वज़ू न छुए उस को मोहतसिब,
बोतल में बंद रूह किसी पारसा की है !

मैं इम्तिहान दे के उन्हें क्यूँ न मर गया,
अब ग़ैर से भी उन को तमन्ना वफ़ा की है !

देखो तो जा के हज़रत-ए-‘बेख़ुद’ न हूँ कहीं,
दावत शराब-ख़ाने में इक पारसा की है !! -Bekhud Dehlvi Ghazal

 

Aap Hain Be-Gunah Kya Kehna..

Aap hain be-gunah kya kehna,
Kya safai hai wah kya kehna.

Us se haal-e-tabah kya kehna,
Jo kahe sun ke wah kya kehna.

Hashr mein ye unhen nayi sujhi,
Ban gaye dad-khwah kya kehna.

Uzr karna sitam ke baad tumhein,
Khub aata hai wah kya kehna.

Tum na roko nigah ko apni,
Hum karen zabt-e-ah kya kehna.

Tujh se achchhe kahan zamane mein,
Wah aye rashk-e-mah kya kehna.

Ghair par lutf-e-khas ka izhaar,
Mujh se tedhi nigah kya kehna.

Ghair se mang kar subut-e-wafa,
Ban gaye khud gawah kya kehna.

Dil bhi le kar nahin yaqeen-e-wafa,
Hai abhi ishtibah kya kehna.

Balbe chitwan teri maaz-allah,
Uf re tedhi nigah kya kehna.

Un gunon par najat ki ummid,
‘Be-khud’-e-ru-siyah kya kehna. !!

आप हैं बे-गुनाह क्या कहना,
क्या सफ़ाई है वाह क्या कहना !

उस से हाल-ए-तबाह क्या कहना,
जो कहे सुन के वाह क्या कहना !

हश्र में ये उन्हें नई सूझी,
बन गए दाद-ख़्वाह क्या कहना !

उज़्र करना सितम के बाद तुम्हें,
ख़ूब आता है वाह क्या कहना !

तुम न रोको निगाह को अपनी,
हम करें ज़ब्त-ए-आह क्या कहना !

तुझ से अच्छे कहाँ ज़माने में,
वाह ऐ रश्क-ए-माह क्या कहना !

ग़ैर पर लुत्फ़-ए-ख़ास का इज़हार ,
मुझ से टेढ़ी निगाह क्या कहना !

ग़ैर से माँग कर सबूत-ए-वफ़ा,
बन गए ख़ुद गवाह क्या कहना !

दिल भी ले कर नहीं यक़ीन-ए-वफ़ा ,
है अभी इश्तिबाह क्या कहना !

बल्बे चितवन तिरी मआज़-अल्लाह,
उफ़ रे टेढ़ी निगाह क्या कहना !

उन गुनों पर नजात की उम्मीद,
‘बे-ख़ुद’-ए-रू-सियाह क्या कहना !! -Bekhud Dehlvi Ghazal