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2 Line Dua Poetry In Hindi

2 Line Dua Poetry In HIndi

2 Line Dua Poetry In Hindi

2 Line Dua Poetry In Hindi बेहतरीन और चुनिंदा शायरी का संग्रह जो की दुआ शब्द को बहुत ही शानदार तरीके से वर्णित करता है ! दुआ पर हिंदी के ये शेर, आपके प्यार और भावनाओं को वक़्त करने में आपकी मदद कर सकते हैं ! यहाँ आप हर तरह की शायरी को पढ़ सकते है और अपने चाहने वालों को शेरे कर सकते हैं !

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Famous Dua Poetry In Hindi.

Auron ki burai na dekhun wo nazar de,
Haan apni burai ko parakhne ka hunar de.

औरों की बुराई को न देखूँ वो नज़र दे,
हाँ अपनी बुराई को परखने का हुनर दे !

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Main kya karun mere qatil na chahne par bhi,
Tere liye mere dil se dua niklati hai.

मैं क्या करूँ मेरे क़ातिल न चाहने पर भी,
तेरे लिए मेरे दिल से दुआ निकलती है !

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Abhi raah mein kai mod hain koi aayega koi jayega,
Tumein jis ne dil se bhula diya usse bhulne ki dua karo.

अभी राह में कई मोड़ हैं कोई आएगा कोई जायेगा,
तुम्हें जिस ने दिल से भुला दिया उसे भूलने की दुआ करो !

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Aakhir dua karein bhi to kis mudda ke saath,
Kaise zmeen ki baat kahein aasman se hum.

आखिर दुआ करें भी तो किस मुद्दे के साथ,
कैसे ज़मीन की बात कहें आसमान से हम !

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Abhi jinda hai maa meri mujhe kuch bhi nahi hoga,
Main ghar se jab nikalta hun dua bhi saath chalti hain.

अभी ज़िंदा है माँ मेरी मुझे कुछ भी नहीं होगा,
मैं घर से जब निकलता हूँ दुआ भी साथ चलती हैं !

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Dua ko haath uthate huye larjta hun,
Kabhi dua nahi mangi thi maa ke hote huye.

दुआ को हाथ उठाते हुए लरजता हूँ,
कभी दुआ नहीं मांगी थी माँ के होते हुए !

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Jab bhi kashti meri selaab mein aa jati hai,
Maa dua karti huyi khwaab mein aa jati hai.

जब भी कश्ती मेरी सैलाब में आ जाती है,
माँ दुआ करती हुई ख्वाब में आ जाती है !

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Jate ho khuda hafeez haan itni guzarish hai,
Jab yaad hum aa jayein milne ki dua karna.

जाते हो ख़ुदा हाफ़िज़ हाँ इतनी गुज़ारिश है,
जब याद हम आ जाएं मिलने की दुआ करना !

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Kyun mang rahe ho kisi baarish ki duayein,
Tum apne shiksta dar-o-deewar to dekho.

क्यों मांग रहे हो किसी बारिश की दुआएं,
तुम अपने शिकस्ता दर-ओ-दीवार तो देखो !

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Mang lun tujhse tujhi ko ki sabhi kuch mil jaye,
Sau sawalon se yahi ek sawal achcha hai.

मांग लूं तुझसे तुझी को की सभी कुछ मिल जाये,
सौ सवालों से यही एक सवाल अच्छा है !

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Mujhe zindagi ki dua dene wale,
Hansi aa rahi hai teri sadgi par.

मुझे ज़िन्दगी की दुआ देने वाले,
हंसी आ रही है तेरी सादगी पर !

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Koi charaah nahi dua ke siwa,
Koi suna nahi khuda ke siwa.

कोई चराह नहीं दुआ के सिवा,
कोई सुना नहीं खुदा के सिवा !

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Hazar bar jo manga karo kya hasil,
Dua wahi hai jo dil se kabhi nikalti hai.

हज़ार बार जो माँगा करो क्या हासिल,
दुआ वही है जो दिल से कभी निकलती है !

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Dua karo ki ye paudha hara hi lage,
Udasiyon mein bhi chehra khila hi lage.

दुआ करो कि ये पौधा हरा ही लगे,
उदासियों में भी चेहरा खिला ही लगे !

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Dua karo ki main us ke liye dua ho jaun,
Wo ek shakhas jo dil ko dua sa lagta hai.

दुआ करो कि मैं उस के लिए दुआ हो जाऊं,
वो एक शख्स जो दिल को दुआ सा लगता है !

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Mangi thi ek bar dua hum ne maut ki,
Sharminda aaj tak hain miyan zindagi se hum.

मांगी थी एक बार दुआ हम ने मौत की,
शर्मिंदा आज तक हैं मियां ज़िन्दगी से हम !

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Marz-e-ishq jise ho usse kya yaad rahe,
Na dawa yaad rahe aur na dua yaad rahe.

मर्ज़-ए-इश्क़ जिसे हो उससे क्या याद रहे,
न दवा याद रहे और न दुआ याद रहे !

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Maine din raat khuda se ye dua mangi thi,
Koi aahat na ho dar par mere jab tu aaye.

मैंने दिन रात खुदा से ये दुआ मांगी थी,
कोई आहट ना हो दर पर मेरे जब तू आये !

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Dur rahti hain sada un se balayein sahil,
Apne maa-baap ki jo roz dua lete hain.

दूर रहती हैं सदा उन से बलायें साहिल,
अपने माँ-बाप की जो रोज़ दुआ लेते हैं !

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Kisi ne chum ke aankhon ko ye dua di thi,
Zameen teri khuda motiyon se num kar de.

किसी ने चुम के आँखों को ये दुआ दी थी,
ज़मीन तेरी खुदा मोतियों से नुम कर दे !

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Tu salamat raho qayamat tak,
Aur qayamat kabhi na aaye “Shad”.

तू सलामत रहो क़यामत तक,
और क़यामत कभी न आये “शाद” !

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Wo bada rahim o qareem hai mujhe ye sifat bhi ataa kare,
Tujhe bhulne ki dua karun to meri dua mein asar na ho.

वो बड़ा रहीम ओ करीम है मुझे ये सिफ़त भी अता करे,
तुझे भूलने की दुआ करूँ तो मेरी दुआ में असर न हो !

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Ye bastiyan hai ki maqlat dua kiye jaye,
Dua ke din hai musalsal dua kiye jaye.

ये बस्तियां है की मकलत दुआ किये जाये,
दुआ के दिन है मुसलसल दुआ किये जाये !

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Wo sarkhushi de ki zindagi ko sharaab se bahar yaab kar de,
Mere khayalon mein rang bhar mere lahu ko sharaab kar de.

वो सरखुशी दे की ज़िन्दगी को शराब से बाहर याब कर दे,
मेरे ख्यालों में रंग भर मेरे लहू को शराब कर दे !

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Jaban pe shikwa-e-mehri-e-khuda kyun hai,
Dua to mangiye “Aatish” kabhi dua ki tarah.

जबान पे शिकवा-ए-मेहरी-ए-खुदा क्यों है,
दुआ तो मांगिये “आतिश” कभी दुआ की तरह !

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Hijr ki shab nala-e-dil wo sada dene lage,
Sunane wale raat ktne ki dua dene lage.

हिज्र की शब् नाला-ए-दिल वो सदा देने लगे,
सुनने वाले रात कटने की दुआ देने लगे !

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Kya-kya duayein mangte hain sab magar “asar”,
Apni yahi dua hai koi mudda na ho.

क्या-क्या दुआएं मांगते हैं सब मगर “असर”,
अपनी यही दुआ है कोई मुद्दा न हो !

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Sahraa ka safar tha to shajar kyun nahi aaya,
Mangi thi duayein to asar kyun nahi aaya.

सहरा का सफर था तो शजर क्यों नहीं आया,
मांगी थी दुआयें तो असर क्यों नहीं आया !

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Dekh kar tul-e-shab-e-hijr dua karta hun,
Wasl ke roz se bhi umar meri kam ho jaye.

देख कर तूल-ए-शब्-ए-हिज्र दुआ करता हूँ,
वस्ल के रोज़ से भी उम्र मेरी कम हो जाये !

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Raah ka sajar hun main aur ek musafir tu,
De koi dua mujh ko le koi dua mujh se.

राह का सजर हूँ मैं और एक मुसाफिर तू,
दे कोई दुआ मुझ को ले कोई दुआ मुझ से !

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Bhul hi jayein hum ko ye to na ho,
Log mere liye dua na karein.

भूल ही जाएं हम को ये तो न हो,
लोग मेरे लिए दुआ न करें !

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Aate hain barg-o-baar darkhaton ke jism par,
Tum bhi uthao haath ki mausam dua ka hai.

आते हैं बर्ग-ओ-बार दरख़्तों के जिस्म पर,
तुम भी उठाओ हाथ कि मौसम दुआ का है !

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Na charagar ki jrurat na kuch dawa ki hai,
Dua ko haath uthao ki gham ki raat kate.

न चारागर की जरुरत न कुछ दवा की है,
दुआ को हाथ उठाओ की ग़म की रात कटे !

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Dushman-e-jaan hi sahi dost samjata hun usse,
Bad-dua jis ki mujhe ban ke dua lagti hai.

दुश्मन-ए-जाँ ही सही दोस्त समझता हूँ उसे,
बद-दुआ जिस की मुझे बन के दुआ लगती है !

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Kaun deta hai mohabbat ko parstish ka maqam,
Tum ye insaaf se socho to dua do hum ko.

कौन देता है मोहब्बत को परस्तिश का मक़ाम,
तुम ये इन्साफ से सोचो तो दुआ दो हम को !

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Us marz ko marz-e-ishq kaha karte hain,
Na dawa hoti hai jis ki na dua hoti hai.

उस मरज़ को मरज़-ए-इश्क़ कहा करते हैं,
न दवा होती है जिस की न दुआ होती है !

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Zameen ko aye khuda wo jaljala de,
Nishan tak sarhdon ke jo mita de.

ज़मीं को ऐ ख़ुदा वो ज़लज़ला दे,
निशाँ तक सरहदों के जो मिटा दे !

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Ek teri tamana ne kuch yesa nawaza hai,
Mangi hi nahi jati ab koi dua hum se.

एक तेरी तमन्ना ने कुछ ऐसा नवाज़ा है,
माँगी ही नहीं जाती अब कोई दुआ हम से !

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Maut mangi thi khudai to nahi mangi thi,
Le dua kar chuke ab tark-e-dua karte hain.

मौत माँगी थी ख़ुदाई तो नहीं माँगी थी,
ले दुआ कर चुके अब तर्क-ए-दुआ करते हैं !

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Haye koi dawa karo haye koi dua karo,
Haye jigar mein dard hai haye jigar ka kya karun.

हाए कोई दवा करो हाए कोई दुआ करो,
हाए जिगर में दर्द है हाए जिगर का क्या करूँ !

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Us dushman-e-wafa ko dua de raha hun main,
Mera na ho saka wo kisi ka to ho gaya.

उस दुश्मन-ए-वफ़ा को दुआ दे रहा हूँ मैं,
मेरा न हो सका वो किसी का तो हो गया !

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Gham-e-dil ab kisi ke bas ka nahi,
Kya dawa kya dua kare koi.

ग़म-ए-दिल अब किसी के बस का नहीं,
क्या दवा क्या दुआ करे कोई !

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Ye mozja bhi kisi ki dua ka lagta hai
Ye shehar ab bhi usi bewafa ka lagta hai.

ये मोजज़ा भी किसी की दुआ का लगता है,
ये शहर अब भी उसी बे-वफ़ा का लगता है !

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Buland haathon mein zanjir dal dete hain,
Ajib rasm chali hai dua na mange koi.

बुलंद हाथों में जंजीर डाल देते हैं,
अजीब रस्म चली है दुआ ना मांगे कोई !

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Ye iltija dua ye tamana fuzul hai,
Sukhi nadi ke paas samundar na jayega.

ये इल्तिजा दुआ ये तमना फ़ुज़ूल है,
सूखी नदी के पास समुन्दर न जायेगा !

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Koi to phool khilaye dua ke lahze mein,
Ajab trah ki ghutan hai hawa ke lahze mein.

कोई तो फूल खिलाए दुआ के लहज़े में,
अजब तरह की घुटन है हवा के लहज़े में !

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Main zindagi ki dua mangne laga hun bahut,
Jo ho sake to duaon ko be-asar kar de.

मैं ज़िन्दगी की दुआ मांगने लगा हूँ बहुत,
जो हो सके तो दुआओं को बे-असर कर दे !

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Baki hi kya raha tujhe mangne ke baad,
Bas ek dua mein chut gaye dua se hum.

बाकी ही क्या रहा तुझे मांगने के बाद,
बस एक दुआ में छूट गए दुआ से हम !

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Na jane kon si manzil pe ishq aa pahuncha,
Dua bhi kaam na aaye koi dawa na lage.

न जाने कौन सी मंज़िल पे इश्क़ आ पहुंचा,
दुआ भी काम न आये कोई दवा न लगे !

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Manga kareinge ab se dua hijr-e-yaar ki,
Aakhir to dushmani hai asar ko dua ke saath.

माँगा करेंगे अब से दुआ हिज्र-ए-यार की,
आख़िर तो दुश्मनी है असर को दुआ के साथ !

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Duayein yaad kara di gayi thi bachpan mein,
So zakhm khate rahe aur dua diye gaye hum.

दुआएँ याद करा दी गई थीं बचपन में,
सो ज़ख़्म खाते रहे और दुआ दिए गए हम !

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Is liye chal na saka koi bhi khanjar mujh par,
Meri shah-rag pe meri maa ki dua rakkhi thi.

इस लिए चल न सका कोई भी ख़ंजर मुझ पर,
मेरी शह-रग पे मेरी माँ की दुआ रक्खी थी !

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Jab lagen zakhm to qatil ko dua di jaye,
Hai yahi rasm to ye rasm utha di jaye.

जब लगें ज़ख़्म तो क़ातिल को दुआ दी जाए,
है यही रस्म तो ये रस्म उठा दी जाए !

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-Dua Shayari / Poetry/ Status / Quotes

 

Hum Ne Kati Hain Teri Yaad Mein Raaten Aksar..

Hum Ne Kati Hain Teri Yaad Mein Raaten Aksar.. Jan Nisar Akhtar Poetry !

Hum ne kati hain teri yaad mein raaten aksar,
Dil se guzri hain sitaron ki baraaten aksar.

Aur to kaun hai jo mujh ko tasalli deta,
Haath rakh deti hain dil par teri baaten aksar.

Husn shaista-e-tahzib-e-alam hai shayed,
Gham-zada lagti hain kyun chandni raaten aksar.

Haal kahna hai kisi se to mukhatab hai koi,
Kitni dilchasp hua karti hain baaten aksar.

Ishq rahzan na sahi ishq ke hathon phir bhi,
Hum ne lutti hui dekhi hain baraten aksar.

Hum se ek bar bhi jita hai na jitega koi,
Wo to hum jaan ke kha lete hain maten aksar.

Un se puchho kabhi chehre bhi padhe hain tum ne,
Jo kitabon ki kiya karte hain baaten aksar.

Hum ne un tund-hawaon mein jalaye hain charagh,
Jin hawaon ne ulat di hain bisaten aksar. !!

हम ने काटी हैं तेरी याद में रातें अक्सर.. “जान निसार अख्तर” कविता हिंदी में !

हम ने काटी हैं तेरी याद में रातें अक्सर,
दिल से गुज़री हैं सितारों की बरातें अक्सर !

और तो कौन है जो मुझ को तसल्ली देता,
हाथ रख देती हैं दिल पर तेरी बातें अक्सर !

हुस्न शाइस्ता-ए-तहज़ीब-ए-अलम है शायद,
ग़म-ज़दा लगती हैं क्यूँ चाँदनी रातें अक्सर !

हाल कहना है किसी से तो मुख़ातब है कोई,
कितनी दिलचस्प हुआ करती हैं बातें अक्सर !

इश्क़ रहज़न न सही इश्क़ के हाथों फिर भी,
हम ने लुटती हुई देखी हैं बरातें अक्सर !

हम से एक बार भी जीता है न जीतेगा कोई,
वो तो हम जान के खा लेते हैं मातें अक्सर !

उन से पूछो कभी चेहरे भी पढ़े हैं तुम ने,
जो किताबों की किया करते हैं बातें अक्सर !

हम ने उन तुंद-हवाओं में जलाए हैं चराग़,
जिन हवाओं ने उलट दी हैं बिसातें अक्सर !!

-Jan Nisar Akhtar Poetry / Ghazals

 

Aye Dard-E-Ishq Tujh Se Mukarne Laga Hun Main..

Aye Dard-E-Ishq Tujh Se Mukarne Laga Hun Main.. Jan Nisar Akhtar Poetry

Aye dard-e-ishq tujh se mukarne laga hun main,
Mujh ko sambhaal had se guzarne laga hun main.

Pahle haqiqaton hi se matlab tha aur ab,
Ek aadh baat farz bhi karne laga hun main.

Har aan tute ye aqidon ke silsile,
Lagta hai jaise aaj bikharne laga hun main.

Aye chashm-e-yar mera sudharna muhaal tha,
Tera kamal hai ki sudharne laga hun main.

Ye mehr-o-mah arz-o-sama mujh mein kho gaye,
Ek kaiyenat ban ke ubharne laga hun main.

Itnon ka pyar mujh se sambhaala na jayega,
Logo tumhaare pyar se darne laga hun main.

Dilli kahan gain tere kuchon ki raunaqen,
Galiyon se sar jhuka ke guzarne laga hun main. !!

ऐ दर्द-ए-इश्क़ तुझ से मुकरने लगा हूँ मैं,
मुझ को संभाल हद से गुज़रने लगा हूँ मैं !

पहले हक़ीक़तों ही से मतलब था और अब,
एक आध बात फ़र्ज़ भी करने लगा हूँ मैं !

हर आन टूटते ये अक़ीदों के सिलसिले,
लगता है जैसे आज बिखरने लगा हूँ मैं !

ऐ चश्म-ए-यार मेरा सुधरना मुहाल था,
तेरा कमाल है कि सुधरने लगा हूँ मैं !

ये मेहर-ओ-माह अर्ज़-ओ-समा मुझ में खो गए,
एक काएनात बन के उभरने लगा हूँ मैं !

इतनों का प्यार मुझ से सँभाला न जाएगा,
लोगो तुम्हारे प्यार से डरने लगा हूँ मैं !

दिल्ली कहाँ गईं तेरे कूचों की रौनक़ें,
गलियों से सर झुका के गुज़रने लगा हूँ मैं !!

-Jan Nisar Akhtar Poetry / Ghazals

 

Sau Chaand Bhi Chamkenge To Kya Baat Banegi

Sau Chaand Bhi Chamkenge To Kya Baat Banegi.. Jan Nisar Akhtar Ghazal

Sau chaand bhi chamkenge to kya baat banegi,
Tum aaye to is raat ki auqat banegi.

Un se yahi kah aayen ki ab hum na milenge,
Aakhir koi taqrib-e-mulaqat banegi.

Aye nawak-e-gham dil mein hai ek bund lahu ki,
Kuch aur to kya hum se mudaraat banegi.

Ye hum se na hoga ki kisi ek ko chahen,
Aye ishq hamari na tere sat banegi.

Ye kya hai ki badhte chalo badhte chalo aage,
Jab baith ke sochenge to kuch baat banegi. !!

Sau Chaand Bhi Chamkenge To Kya Baat Banegi.. Jan Nisar Akhtar Ghazal In Hindi Language

सौ चाँद भी चमकेंगे तो क्या बात बनेगी,
तुम आए तो इस रात की औक़ात बनेगी !

उन से यही कह आएँ कि अब हम न मिलेंगे,
आख़िर कोई तक़रीब-ए-मुलाक़ात बनेगी !

ऐ नावक-ए-ग़म दिल में है एक बूँद लहू की,
कुछ और तो क्या हम से मुदारात बनेगी !

ये हम से न होगा कि किसी एक को चाहें,
ऐ इश्क़ हमारी न तेरे सात बनेगी !

ये क्या है कि बढ़ते चलो बढ़ते चलो आगे,
जब बैठ के सोचेंगे तो कुछ बात बनेगी !!

-Jan Nisar Akhtar Ghazals / Poetry

 

Halqe Nahi Hain Zulf Ke Halqe Hain Jal Ke

Halqe nahi hain zulf ke halqe hain jal ke,
Han aye nigah-e-shauq zara dekh-bhaal ke.

Pahunche hain ta-kamar jo tere gesu-e-rasa,
Mani ye hain kamar bhi barabar hai baal ke.

Bos-o-kanar-o-wasl-e-hasinan hai khub shaghl,
Kamtar buzurg honge khilaf is khayal ke.

Qamat se tere sane-e-qudrat ne aye hasin,
Dikhla diya hai hashr ko sanche mein dhaal ke.

Shan-e-dimagh ishq ke jalwe se ye badhi,
Rakhta hai hosh bhi qadam apne sambhaal ke.

Zinat muqaddama hai musibat ka dahr mein,
Sab shama ko jalate hain sanche mein dhaal ke.

Hasti ke haq ke samne kya asl-e-in-o-an,
Putle ye sab hain aap ke wahm-o-khayal ke.

Talwar le ke uthta hai har talib-e-farogh,
Daur-e-falak mein hain ye ishaare hilal ke.

Pechida zindagi ke karo tum muqaddame,
Dikhla hi degi maut natija nikal ke. !!

-Akbar Allahabadi Ghazal / Urdu Poetry

 

Dil Ho Kharab Din Pe Jo Kuch Asar Pade

Dil ho kharab din pe jo kuch asar pade,
Ab kar-e-ashiqi to bahar-kaif kar pade.

Ishq-e-butan ka din pe jo kuch asar pade,
Ab to nibahna hai jab ek kaam kar pade.

Mazhab chhudaya ishwa-e-duniya ne shaikh se,
Dekhi jo rail unt se aakhir utar pade.

Betabiyan nasib na thin warna ham-nashin,
Ye kya zarur tha ki unhin par nazar pade.

Behtar yahi hai qasd udhar ka karen na wo,
Aisa na ho ki rah mein dushman ka ghar pade.

Hum chahte hain mel wajud-o-adam mein ho,
Mumkin to hai jo beach mein un ki kamar pade.

Dana wahi hai dil jo kare aap ka khayal,
Bina wahi nazar hai ki jo aap par pade.

Honi na chahiye thi mohabbat magar hui,
Padna na chahiye tha ghazab mein magar pade.

Shaitan ki na man jo rahat-nasib ho,
Allah ko pukar musibat agar pade.

Aye shaikh un buton ki ye chaalakiyan to dekh,
Nikle agar haram se to “Akbar” ke ghar pade. !!

 

Tariq-E-Ishq Mein Mujh Ko Koi Kaamil Nahi Milta

Tariq-e-ishq mein mujh ko koi kaamil nahi milta,
Gaye farhad o majnun ab kisi se dil nahi milta.

Bhari hai anjuman lekin kisi se dil nahi milta,
Hamin mein aa gaya kuch naqs ya kaamil nahi milta.

Purani raushni mein aur nai mein farq itna hai,
Use kashti nahi milti ise sahil nahi milta.

Pahunchna dad ko mazlum ka mushkil hi hota hai,
Kabhi qazi nahi milte kabhi qatil nahi milta.

Harifon par khazane hain khule yan hijr-e-gesu hai,
Wahan pe bil hai aur yan sanp ka bhi bil nahi milta.

Ye husn o ishq hi ka kaam hai shubah karen kis par,
Mizaj un ka nahi milta hamara dil nahi milta.

Chhupa hai sina o rukh dil-sitan hathon se karwat mein,
Mujhe sote mein bhi wo husn se ghafil nahi milta.

Hawas-o-hosh gum hain bahr-e-irfan-e-ilahi mein,
Yahi dariya hai jis mein mauj ko sahil nahi milta.

Kitab-e-dil mujhe kafi hai “Akbar” dars-e-hikmat ko,
Main spencer se mustaghni hun mujh se mil nahi milta. !!

 

Ishq-E-But Mein Kufr Ka Mujh Ko Adab Karna Pada

Ishq-e-but mein kufr ka mujh ko adab karna pada,
Jo barhaman ne kaha aakhir wo sab karna pada.

Sabr karna furqat-e-mahbub mein samjhe the sahl,
Khul gaya apni samajh ka haal jab karna pada.

Tajrabe ne hubb-e-duniya se sikhaya ehtiraaz,
Pahle kahte the faqat munh se aur ab karna pada.

Shaikh ki majlis mein bhi muflis ki kuch pursish nahi,
Din ki khatir se duniya ko talab karna pada.

Kya kahun be-khud hua main kis nigah-e-mast se,
Aql ko bhi meri hasti ka adab karna pada.

Iqtiza fitrat ka rukta hai kahin aye ham-nashin,
Shaikh-sahib ko bhi aakhir kar-e-shab karna pada.

Aalam-e-hasti ko tha madd-e-nazar katman-e-raaz,
Ek shai ko dusri shai ka sabab karna pada.

Sher ghairon ke use mutlaq nahin aaye pasand,
Hazrat-e-“Akbar” ko bil-akhir talab karna pada. !!

 

Na Hasil Hua Sabr-O-Aram Dil Ka..

Na hasil hua sabr-o-aram dil ka,
Na nikla kabhi tum se kuch kaam dil ka.

Mohabbat ka nashsha rahe kyun na har-dam,
Bhara hai mai-e-ishq se jaam dil ka.

Phansaya to aankhon ne dam-e-bala mein,
Magar ishq mein ho gaya naam dil ka.

Hua khwab ruswa ye ishq-e-butan mein,
Khuda hi hai ab mere badnaam dil ka.

Ye banki adayen ye tirchhi nigahyen,
Yahi le gain sabr-o-aram dil ka.

Dhuan pahle uthta tha aaghaz tha wo,
Hua khak ab ye hai anjam dil ka.

Jab aaghaz-e-ulfat hi mein jal raha hai,
To kya khak batlaun anjam dil ka.

Khuda ke liye pher do mujh ko sahab,
Jo sarkar mein kuch na ho kaam dil ka.

Pas-e-marg un par khula haal-e-ulfat,
Gayi le ke ruh apni paigham dil ka.

Tadapta hua yun na paya hamesha,
Kahun kya main aaghaz-o-anjam dil ka.

Dil us bewafa ko jo dete ho “Akbar“,
To kuch soch lo pahle anjam dil ka. !!

 

Jazba-E-Dil Ne Mere Tasir Dikhlai To Hai

Jazba-e-dil ne mere tasir dikhlai to hai,
Ghungruon ki jaanib-e-dar kuch sada aayi to hai.

Ishq ke izhaar mein har-chand ruswai to hai,
Par karun kya ab tabiat aap par aayi to hai.

Aap ke sar ki qasam mere siwa koi nahi,
Be-takalluf aaiye kamre mein tanhai to hai.

Jab kaha main ne tadapta hai bahut ab dil mera,
hans ke farmaya tadapta hoga saudai to hai.

Dekhiye hoti hai kab rahi su-e-mulk-e-adam,
Khana-e-tan se hamari ruh ghabrai to hai.

Dil dhadakta hai mera lun bosa-e-rukh ya na lun,
Nind mein us ne dulai munh se sarkai to hai.

Dekhiye lab tak nahi aati gul-e-ariz ki yaad,
Sair-e-gulshan se tabiat hum ne bahlai to hai.

Main bala mein kyun phansun diwana ban kar us ke sath,
Dil ko wahshat ho to ho kambakht saudai to hai.

Khak mein dil ko milaya jalwa-e-raftar se,
Kyun na ho aye naujawan ek shan-e-ranai to hai.

Yun murawwat se tumhaare samne chup ho rahen,
Kal ke jalson ki magar hum ne khabar pai to hai.

Baada-e-gul-rang ka saghar inayat kar mujhe,
Saqiya takhir kya hai ab ghata chhai to hai.

Jis ki ulfat par bada dawa tha kal “Akbar” tumhein,
Aaj hum ja kar use dekh aaye harjai to hai. !!

जज़्बा-ए-दिल ने मेरे तासीर दिखलाई तो है,
घुंघरूओं की जानिब-ए-दर कुछ सदा आई तो है !

इश्क़ के इज़हार में हर-चंद रुस्वाई तो है,
पर करूँ क्या अब तबीअत आप पर आई तो है !

आप के सर की क़सम मेरे सिवा कोई नहीं,
बे-तकल्लुफ़ आइए कमरे में तन्हाई तो है !

जब कहा मैं ने तड़पता है बहुत अब दिल मेरा,
हंस के फ़रमाया तड़पता होगा सौदाई तो है !

देखिए होती है कब राही सू-ए-मुल्क-ए-अदम,
ख़ाना-ए-तन से हमारी रूह घबराई तो है !

दिल धड़कता है मेरा लूँ बोसा-ए-रुख़ या न लूँ,
नींद में उस ने दुलाई मुँह से सरकाई तो है !

देखिए लब तक नहीं आती गुल-ए-आरिज़ की याद,
सैर-ए-गुलशन से तबीअत हम ने बहलाई तो है !

मैं बला में क्यूँ फँसूँ दीवाना बन कर उस के साथ,
दिल को वहशत हो तो हो कम्बख़्त सौदाई तो है !

ख़ाक में दिल को मिलाया जल्वा-ए-रफ़्तार से,
क्यूँ न हो ऐ नौजवाँ इक शान-ए-रानाई तो है !

यूँ मुरव्वत से तुम्हारे सामने चुप हो रहें,
कल के जलसों की मगर हम ने ख़बर पाई तो है !

बादा-ए-गुल-रंग का साग़र इनायत कर मुझे,
साक़िया ताख़ीर क्या है अब घटा छाई तो है !

जिस की उल्फ़त पर बड़ा दावा था कल “अकबर” तुम्हें,
आज हम जा कर उसे देख आए हरजाई तो है !!