Tuesday , March 9 2021

Poetry Types Haath

Kandhe Jhuk Jate Hain Jab Bojh Se Is Lambe Safar Ke..

Kandhe Jhuk Jate Hain Jab Bojh Se Is Lambe Safar Ke.. Gulzar Nazm !

Kandhe jhuk jate hain jab bojh se is lambe safar ke
Hanp jata hun main jab chadhte hue tez chadhanen
Sansen rah jati hain jab sine mein ek guchcha sa ho kar
Aur lagta hai ki dam tut hi jayega yahin par

Ek nannhi si meri nazm samne aa kar
Mujhse kahti hai mera haath pakad kar mere shayar
La mere kandhon par rakh de, main tera bojh utha lun. !! -Gulzar Nazm

कंधे झुक जाते हैं जब बोझ से इस लम्बे सफ़र के
हाँप जाता हूँ मैं जब चढ़ते हुए तेज़ चढ़ानें
साँसें रह जाती हैं जब सीने में एक गुच्छा सा हो कर
और लगता है कि दम टूट ही जाएगा यहीं पर

एक नन्ही सी मेरी नज़्म सामने आ कर
मुझसे कहती है मेरा हाथ पकड़ कर, मेरे शायर
ला मेरे कंधों पर रख दे, मैं तेरा बोझ उठा लूँ !! -गुलज़ार नज़्म

 

Yun Sada Dete Hue Tere Khayal Aate Hain..

Yun Sada Dete Hue Tere Khayal Aate Hain.. Rahat Indori Shayari !

Yun sada dete hue tere khayal aate hain,
Jaise kabe ki khuli chhat pe bilal aate hain.

Roz hum ashkon se dho aate hain diwar-e-haram,
Pagdiyan roz farishton ki uchhaal aate hain.

Haath abhi pichhe bandhe rahte hain chup rahte hain,
Dekhna ye hai tujhe kitne kamal aate hain.

Chaand sooraj meri chaukhat pe kai sadiyon se,
Roz likkhe hue chehre pe sawal aate hain.

Be-hisi muda-dili raqs sharaben naghme,
Bas isi rah se qaumon pe zawal aate hain. !!

यूँ सदा देते हुए तेरे ख़याल आते हैं,
जैसे काबे की खुली छत पे बिलाल आते हैं !

रोज़ हम अश्कों से धो आते हैं दीवार-ए-हरम,
पगड़ियाँ रोज़ फ़रिश्तों की उछाल आते हैं !

हाथ अभी पीछे बंधे रहते हैं चुप रहते हैं,
देखना ये है तुझे कितने कमाल आते हैं !

चाँद सूरज मेरी चौखट पे कई सदियों से,
रोज़ लिक्खे हुए चेहरे पे सवाल आते हैं !

बे-हिसी मुर्दा-दिली रक़्स शराबें नग़्मे,
बस इसी राह से क़ौमों पे ज़वाल आते हैं !!

-Rahat Indori Shayari /Ghazal /Poerty

 

2 Line Dua Poetry In Hindi

2 Line Dua Poetry In HIndi

2 Line Dua Poetry In Hindi

2 Line Dua Poetry In Hindi बेहतरीन और चुनिंदा शायरी का संग्रह जो की दुआ शब्द को बहुत ही शानदार तरीके से वर्णित करता है ! दुआ पर हिंदी के ये शेर, आपके प्यार और भावनाओं को वक़्त करने में आपकी मदद कर सकते हैं ! यहाँ आप हर तरह की शायरी को पढ़ सकते है और अपने चाहने वालों को शेरे कर सकते हैं !

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Famous Dua Poetry In Hindi.

Auron ki burai na dekhun wo nazar de,
Haan apni burai ko parakhne ka hunar de.

औरों की बुराई को न देखूँ वो नज़र दे,
हाँ अपनी बुराई को परखने का हुनर दे !

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Main kya karun mere qatil na chahne par bhi,
Tere liye mere dil se dua niklati hai.

मैं क्या करूँ मेरे क़ातिल न चाहने पर भी,
तेरे लिए मेरे दिल से दुआ निकलती है !

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Abhi raah mein kai mod hain koi aayega koi jayega,
Tumein jis ne dil se bhula diya usse bhulne ki dua karo.

अभी राह में कई मोड़ हैं कोई आएगा कोई जायेगा,
तुम्हें जिस ने दिल से भुला दिया उसे भूलने की दुआ करो !

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Aakhir dua karein bhi to kis mudda ke saath,
Kaise zmeen ki baat kahein aasman se hum.

आखिर दुआ करें भी तो किस मुद्दे के साथ,
कैसे ज़मीन की बात कहें आसमान से हम !

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Abhi jinda hai maa meri mujhe kuch bhi nahi hoga,
Main ghar se jab nikalta hun dua bhi saath chalti hain.

अभी ज़िंदा है माँ मेरी मुझे कुछ भी नहीं होगा,
मैं घर से जब निकलता हूँ दुआ भी साथ चलती हैं !

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Dua ko haath uthate huye larjta hun,
Kabhi dua nahi mangi thi maa ke hote huye.

दुआ को हाथ उठाते हुए लरजता हूँ,
कभी दुआ नहीं मांगी थी माँ के होते हुए !

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Jab bhi kashti meri selaab mein aa jati hai,
Maa dua karti huyi khwaab mein aa jati hai.

जब भी कश्ती मेरी सैलाब में आ जाती है,
माँ दुआ करती हुई ख्वाब में आ जाती है !

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Jate ho khuda hafeez haan itni guzarish hai,
Jab yaad hum aa jayein milne ki dua karna.

जाते हो ख़ुदा हाफ़िज़ हाँ इतनी गुज़ारिश है,
जब याद हम आ जाएं मिलने की दुआ करना !

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Kyun mang rahe ho kisi baarish ki duayein,
Tum apne shiksta dar-o-deewar to dekho.

क्यों मांग रहे हो किसी बारिश की दुआएं,
तुम अपने शिकस्ता दर-ओ-दीवार तो देखो !

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Mang lun tujhse tujhi ko ki sabhi kuch mil jaye,
Sau sawalon se yahi ek sawal achcha hai.

मांग लूं तुझसे तुझी को की सभी कुछ मिल जाये,
सौ सवालों से यही एक सवाल अच्छा है !

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Mujhe zindagi ki dua dene wale,
Hansi aa rahi hai teri sadgi par.

मुझे ज़िन्दगी की दुआ देने वाले,
हंसी आ रही है तेरी सादगी पर !

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Koi charaah nahi dua ke siwa,
Koi suna nahi khuda ke siwa.

कोई चराह नहीं दुआ के सिवा,
कोई सुना नहीं खुदा के सिवा !

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Hazar bar jo manga karo kya hasil,
Dua wahi hai jo dil se kabhi nikalti hai.

हज़ार बार जो माँगा करो क्या हासिल,
दुआ वही है जो दिल से कभी निकलती है !

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Dua karo ki ye paudha hara hi lage,
Udasiyon mein bhi chehra khila hi lage.

दुआ करो कि ये पौधा हरा ही लगे,
उदासियों में भी चेहरा खिला ही लगे !

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Dua karo ki main us ke liye dua ho jaun,
Wo ek shakhas jo dil ko dua sa lagta hai.

दुआ करो कि मैं उस के लिए दुआ हो जाऊं,
वो एक शख्स जो दिल को दुआ सा लगता है !

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Mangi thi ek bar dua hum ne maut ki,
Sharminda aaj tak hain miyan zindagi se hum.

मांगी थी एक बार दुआ हम ने मौत की,
शर्मिंदा आज तक हैं मियां ज़िन्दगी से हम !

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Marz-e-ishq jise ho usse kya yaad rahe,
Na dawa yaad rahe aur na dua yaad rahe.

मर्ज़-ए-इश्क़ जिसे हो उससे क्या याद रहे,
न दवा याद रहे और न दुआ याद रहे !

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Maine din raat khuda se ye dua mangi thi,
Koi aahat na ho dar par mere jab tu aaye.

मैंने दिन रात खुदा से ये दुआ मांगी थी,
कोई आहट ना हो दर पर मेरे जब तू आये !

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Dur rahti hain sada un se balayein sahil,
Apne maa-baap ki jo roz dua lete hain.

दूर रहती हैं सदा उन से बलायें साहिल,
अपने माँ-बाप की जो रोज़ दुआ लेते हैं !

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Kisi ne chum ke aankhon ko ye dua di thi,
Zameen teri khuda motiyon se num kar de.

किसी ने चुम के आँखों को ये दुआ दी थी,
ज़मीन तेरी खुदा मोतियों से नुम कर दे !

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Tu salamat raho qayamat tak,
Aur qayamat kabhi na aaye “Shad”.

तू सलामत रहो क़यामत तक,
और क़यामत कभी न आये “शाद” !

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Wo bada rahim o qareem hai mujhe ye sifat bhi ataa kare,
Tujhe bhulne ki dua karun to meri dua mein asar na ho.

वो बड़ा रहीम ओ करीम है मुझे ये सिफ़त भी अता करे,
तुझे भूलने की दुआ करूँ तो मेरी दुआ में असर न हो !

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Ye bastiyan hai ki maqlat dua kiye jaye,
Dua ke din hai musalsal dua kiye jaye.

ये बस्तियां है की मकलत दुआ किये जाये,
दुआ के दिन है मुसलसल दुआ किये जाये !

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Wo sarkhushi de ki zindagi ko sharaab se bahar yaab kar de,
Mere khayalon mein rang bhar mere lahu ko sharaab kar de.

वो सरखुशी दे की ज़िन्दगी को शराब से बाहर याब कर दे,
मेरे ख्यालों में रंग भर मेरे लहू को शराब कर दे !

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Jaban pe shikwa-e-mehri-e-khuda kyun hai,
Dua to mangiye “Aatish” kabhi dua ki tarah.

जबान पे शिकवा-ए-मेहरी-ए-खुदा क्यों है,
दुआ तो मांगिये “आतिश” कभी दुआ की तरह !

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Hijr ki shab nala-e-dil wo sada dene lage,
Sunane wale raat ktne ki dua dene lage.

हिज्र की शब् नाला-ए-दिल वो सदा देने लगे,
सुनने वाले रात कटने की दुआ देने लगे !

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Kya-kya duayein mangte hain sab magar “asar”,
Apni yahi dua hai koi mudda na ho.

क्या-क्या दुआएं मांगते हैं सब मगर “असर”,
अपनी यही दुआ है कोई मुद्दा न हो !

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Sahraa ka safar tha to shajar kyun nahi aaya,
Mangi thi duayein to asar kyun nahi aaya.

सहरा का सफर था तो शजर क्यों नहीं आया,
मांगी थी दुआयें तो असर क्यों नहीं आया !

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Dekh kar tul-e-shab-e-hijr dua karta hun,
Wasl ke roz se bhi umar meri kam ho jaye.

देख कर तूल-ए-शब्-ए-हिज्र दुआ करता हूँ,
वस्ल के रोज़ से भी उम्र मेरी कम हो जाये !

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Raah ka sajar hun main aur ek musafir tu,
De koi dua mujh ko le koi dua mujh se.

राह का सजर हूँ मैं और एक मुसाफिर तू,
दे कोई दुआ मुझ को ले कोई दुआ मुझ से !

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Bhul hi jayein hum ko ye to na ho,
Log mere liye dua na karein.

भूल ही जाएं हम को ये तो न हो,
लोग मेरे लिए दुआ न करें !

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Aate hain barg-o-baar darkhaton ke jism par,
Tum bhi uthao haath ki mausam dua ka hai.

आते हैं बर्ग-ओ-बार दरख़्तों के जिस्म पर,
तुम भी उठाओ हाथ कि मौसम दुआ का है !

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Na charagar ki jrurat na kuch dawa ki hai,
Dua ko haath uthao ki gham ki raat kate.

न चारागर की जरुरत न कुछ दवा की है,
दुआ को हाथ उठाओ की ग़म की रात कटे !

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Dushman-e-jaan hi sahi dost samjata hun usse,
Bad-dua jis ki mujhe ban ke dua lagti hai.

दुश्मन-ए-जाँ ही सही दोस्त समझता हूँ उसे,
बद-दुआ जिस की मुझे बन के दुआ लगती है !

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Kaun deta hai mohabbat ko parstish ka maqam,
Tum ye insaaf se socho to dua do hum ko.

कौन देता है मोहब्बत को परस्तिश का मक़ाम,
तुम ये इन्साफ से सोचो तो दुआ दो हम को !

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Us marz ko marz-e-ishq kaha karte hain,
Na dawa hoti hai jis ki na dua hoti hai.

उस मरज़ को मरज़-ए-इश्क़ कहा करते हैं,
न दवा होती है जिस की न दुआ होती है !

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Zameen ko aye khuda wo jaljala de,
Nishan tak sarhdon ke jo mita de.

ज़मीं को ऐ ख़ुदा वो ज़लज़ला दे,
निशाँ तक सरहदों के जो मिटा दे !

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Ek teri tamana ne kuch yesa nawaza hai,
Mangi hi nahi jati ab koi dua hum se.

एक तेरी तमन्ना ने कुछ ऐसा नवाज़ा है,
माँगी ही नहीं जाती अब कोई दुआ हम से !

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Maut mangi thi khudai to nahi mangi thi,
Le dua kar chuke ab tark-e-dua karte hain.

मौत माँगी थी ख़ुदाई तो नहीं माँगी थी,
ले दुआ कर चुके अब तर्क-ए-दुआ करते हैं !

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Haye koi dawa karo haye koi dua karo,
Haye jigar mein dard hai haye jigar ka kya karun.

हाए कोई दवा करो हाए कोई दुआ करो,
हाए जिगर में दर्द है हाए जिगर का क्या करूँ !

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Us dushman-e-wafa ko dua de raha hun main,
Mera na ho saka wo kisi ka to ho gaya.

उस दुश्मन-ए-वफ़ा को दुआ दे रहा हूँ मैं,
मेरा न हो सका वो किसी का तो हो गया !

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Gham-e-dil ab kisi ke bas ka nahi,
Kya dawa kya dua kare koi.

ग़म-ए-दिल अब किसी के बस का नहीं,
क्या दवा क्या दुआ करे कोई !

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Ye mozja bhi kisi ki dua ka lagta hai
Ye shehar ab bhi usi bewafa ka lagta hai.

ये मोजज़ा भी किसी की दुआ का लगता है,
ये शहर अब भी उसी बे-वफ़ा का लगता है !

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Buland haathon mein zanjir dal dete hain,
Ajib rasm chali hai dua na mange koi.

बुलंद हाथों में जंजीर डाल देते हैं,
अजीब रस्म चली है दुआ ना मांगे कोई !

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Ye iltija dua ye tamana fuzul hai,
Sukhi nadi ke paas samundar na jayega.

ये इल्तिजा दुआ ये तमना फ़ुज़ूल है,
सूखी नदी के पास समुन्दर न जायेगा !

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Koi to phool khilaye dua ke lahze mein,
Ajab trah ki ghutan hai hawa ke lahze mein.

कोई तो फूल खिलाए दुआ के लहज़े में,
अजब तरह की घुटन है हवा के लहज़े में !

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Main zindagi ki dua mangne laga hun bahut,
Jo ho sake to duaon ko be-asar kar de.

मैं ज़िन्दगी की दुआ मांगने लगा हूँ बहुत,
जो हो सके तो दुआओं को बे-असर कर दे !

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Baki hi kya raha tujhe mangne ke baad,
Bas ek dua mein chut gaye dua se hum.

बाकी ही क्या रहा तुझे मांगने के बाद,
बस एक दुआ में छूट गए दुआ से हम !

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Na jane kon si manzil pe ishq aa pahuncha,
Dua bhi kaam na aaye koi dawa na lage.

न जाने कौन सी मंज़िल पे इश्क़ आ पहुंचा,
दुआ भी काम न आये कोई दवा न लगे !

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Manga kareinge ab se dua hijr-e-yaar ki,
Aakhir to dushmani hai asar ko dua ke saath.

माँगा करेंगे अब से दुआ हिज्र-ए-यार की,
आख़िर तो दुश्मनी है असर को दुआ के साथ !

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Duayein yaad kara di gayi thi bachpan mein,
So zakhm khate rahe aur dua diye gaye hum.

दुआएँ याद करा दी गई थीं बचपन में,
सो ज़ख़्म खाते रहे और दुआ दिए गए हम !

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Is liye chal na saka koi bhi khanjar mujh par,
Meri shah-rag pe meri maa ki dua rakkhi thi.

इस लिए चल न सका कोई भी ख़ंजर मुझ पर,
मेरी शह-रग पे मेरी माँ की दुआ रक्खी थी !

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Jab lagen zakhm to qatil ko dua di jaye,
Hai yahi rasm to ye rasm utha di jaye.

जब लगें ज़ख़्म तो क़ातिल को दुआ दी जाए,
है यही रस्म तो ये रस्म उठा दी जाए !

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-Dua Shayari / Poetry/ Status / Quotes

 

Tu Mera Hai..

Tu mera hai,
Tere man mein chhupe hue sab dukh mere hain,
Teri aankh ke aansu mere,
Tere labon pe nachne wali ye masum hansi bhi meri..

Tu mera hai,
Har wo jhonka,
Jis ke lams ko,
Apne jism pe tu ne bhi mahsus kiya hai..

Pahle mere hathon ko,
Chhu kar guzra tha,
Tere ghar ke darwaze par,
Dastak dene wala..

Har wo lamha jis mein,
Tujh ko apni tanhai ka,
Shiddat se ehsas hua tha,
Pahle mere ghar aaya tha..

Tu mera hai,
Tera mazi bhi mera tha,
Aane wali har saat bhi meri hogi,
Tere tapte aariz ki dopahar hai meri..

Sham ki tarah gahre gahre ye palkon saye hain mere,
Tere siyah baalon ki shab se dhup ki surat,
Wo subhen jo kal jagengi,
Meri hongi..

Tu mera hai,
Lekin tere sapnon mein bhi aate hue ye dar lagta hai,
Mujh se kahin tu puchh na baithe,
Kyun aaye ho,
Mera tum se kya nata hai.. !!

तू मेरा है,
तेरे मन में छुपे हुए सब दुख मेरे हैं,
तेरी आँख के आँसू मेरे,
तेरे लबों पे नाचने वाली ये मासूम हँसी भी मेरी..

तू मेरा है,
हर वो झोंका,
जिस के लम्स को,
अपने जिस्म पे तू ने भी महसूस किया है..

पहले मेरे हाथों को,
छू कर गुज़रा था,
तेरे घर के दरवाज़े पर,
दस्तक देने वाला..

हर वो लम्हा जिस में,
तुझ को अपनी तन्हाई का,
शिद्दत से एहसास हुआ था,
पहले मेरे घर आया था..

तू मेरा है,
तेरा माज़ी भी मेरा था,
आने वाली हर साअत भी मेरी होगी,
तेरे तपते आरिज़ की दोपहर है मेरी..

शाम की तरह गहरे गहरे ये पलकों साए हैं मेरे,
तेरे सियाह बालों की शब से धूप की सूरत,
वो सुब्हें जो कल जागेंगी,
मेरी होंगी..

तू मेरा है ,
लेकिन तेरे सपनों में भी आते हुए ये डर लगता है,
मुझ से कहीं तू पूछ न बैठे,
क्यूँ आए हो,
मेरा तुम से क्या नाता है.. !!

-Aanis Moin Nazm

 

Kitne Hi Ped Khauf-E-Khizan Se Ujad Gaye..

Kitne hi ped khauf-e-khizan se ujad gaye,
Kuchh barg-e-sabz waqt se pahle hi jhad gaye.

Kuchh aadhiyan bhi apnī muavin safar mein thi,
Thak kar padav dala to kheme ukhad gaye.

Ab ke meri shikast mein un ka bhi haath hai,
Woh tir jo kaman ke panje mein gad gaye.

Suljhi thi gutthiyan meri danist mein magar,
Hasil ye hai ki zakhmon ke tanke ukhad gaye.

Nirwan kya bas ab to aman ki talash hai,
Tahzib phailne lagi jangal sukad gaye.

Is band ghar mein kaise kahun kya tilism hai,
Khole the jitne qufl woh honthon pe pad gaye.

Be-saltanat hui hain kayi unchi gardanen,
Bahar saron ke dast-e-tasallut se dhad gaye. !!

कितने ही पेड़ ख़ौफ़-ए-ख़िज़ाँ से उजड़ गए,
कुछ बर्ग-ए-सब्ज़ वक़्त से पहले ही झड़ गए !

कुछ आँधियाँ भी अपनी मुआविन सफ़र में थीं,
थक कर पड़ाव डाला तो ख़ेमे उखड़ गए !

अब के मेरी शिकस्त में उन का भी हाथ है,
वो तीर जो कमान के पंजे में गड़ गए !

सुलझी थीं गुत्थियाँ मेरी दानिस्त में मगर,
हासिल ये है कि ज़ख़्मों के टाँके उखड़ गए !

निरवान क्या बस अब तो अमाँ की तलाश है,
तहज़ीब फैलने लगी जंगल सुकड़ गए !

इस बंद घर में कैसे कहूँ क्या तिलिस्म है,
खोले थे जितने क़ुफ़्ल वो होंटों पे पड़ गए !

बे-सल्तनत हुई हैं कई ऊँची गर्दनें,
बाहर सरों के दस्त-ए-तसल्लुत से धड़ गए !!

-Aanis Moin Ghazal / Poetry

 

Ek Karb-E-Musalsal Ki Saza Den To Kise Den..

Ek karb-e-musalsal ki saza den to kise den,
Maqtal mein hain jine ki dua den to kise den.

Patthar hain sabhi log karen baat to kis se,
Is shahr-e-khamoshan mein sada den to kise den.

Hai kaun ki jo khud ko hi jalta hua dekhe,
Sab hath hain kaghaz ke diya den to kise den.

Sab log sawali hain sabhi jism barahna,
Aur pas hai bas ek rida den to kise den.

Jab hath hi kat jayen to thamega bhala kaun,
Ye soch rahe hain ki asa den to kise den.

Bazar mein khushbu ke kharidar kahan hain,
Ye phool hain be-rang bata den to kise den.

Chup rahne ki har shakhs qasam khaye hue hai,
Hum zahr bhara jam bhala den to kise den. !!

एक कर्ब-ए-मुसलसल की सज़ा दें तो किसे दें,
मक़्तल में हैं जीने की दुआ दें तो किसे दें !

पत्थर हैं सभी लोग करें बात तो किस से,
इस शहर-ए-ख़मोशाँ में सदा दें तो किसे दें !

है कौन कि जो ख़ुद को ही जलता हुआ देखे,
सब हाथ हैं काग़ज़ के दिया दें तो किसे दें !

सब लोग सवाली हैं सभी जिस्म बरहना,
और पास है बस एक रिदा दें तो किसे दें !

जब हाथ ही कट जाएँ तो थामेगा भला कौन,
ये सोच रहे हैं कि असा दें तो किसे दें !

बाज़ार में ख़ुशबू के ख़रीदार कहाँ हैं,
ये फूल हैं बे-रंग बता दें तो किसे दें !

चुप रहने की हर शख़्स क़सम खाए हुए है,
हम ज़हर भरा जाम भला दें तो किसे दें !!

-Aanis Moin Ghazal / Poetry

 

Baat Karni Hai Baat Kaun Kare..

Baat karni hai baat kaun kare,
Dard se do-do hath kaun kare.

Hum sitare tumhein bulate hain,
Chand na ho to raat kaun kare.

Ab tujhe rab kahen ya but samjhein,
Ishq mein zat-pat kaun kare.

Zindagi bhar ki the kamai tum,
Is se zyaada zakat kaun kare. !!

बात करनी है बात कौन करे,
दर्द से दो-दो हाथ कौन करे !

हम सितारे तुम्हें बुलाते हैं,
चाँद न हो तो रात कौन करे !

अब तुझे रब कहें या बुत समझें,
इश्क़ में ज़ात-पात कौन करे !

ज़िंदगी भर की थे कमाई तुम,
इस से ज़्यादा ज़कात कौन करे !!

-Kumar Vishwas Poem

 

Hath Aa Kar Laga Gaya Koi..

Hath aa kar laga gaya koi,
Mera chhappar utha gaya koi.

Lag gaya ek masheen mein main bhi,
Shehar mein le ke aa gaya koi.

Main khada tha ki peeth par meri,
Ishtihaar ek laga gaya koi.

Ye sadi dhoop ko tarasti hai,
Jaise sooraj ko kha gaya koi.

Aisi mehangaai hai ki chehra bhi,
Bech ke apna kha gaya koi.

Ab woh armaan hain na woh sapne,
Sab kabootar uda gaya koi.

Woh gaye jab se aisa lagta hai,
Chhota mota khuda gaya koi.

Mera bachpan bhi saath le gaya,
Gaaon se jab bhi aa gaya koi. !!

हाथ आ कर लगा गया कोई,
मेरा छप्पर उठा गया कोई !

लग गया एक मशीन में मैं भी,
शहर में ले के आ गया कोई !

मैं खड़ा था कि पीठ पर मेरी,
इश्तिहार एक लगा गया कोई !

ये सदी धूप को तरसती है,
जैसे सूरज को खा गया कोई !

ऐसी महँगाई है कि चेहरा भी,
बेच के अपना खा गया कोई !

अब वो अरमान हैं न वो सपने,
सब कबूतर उड़ा गया कोई !

वो गए जब से ऐसा लगता है,
छोटा मोटा ख़ुदा गया कोई !

मेरा बचपन भी साथ ले आया,
गाँव से जब भी आ गया कोई !!

-Kaifi Azmi Ghazal / Poetry

 

Aakhiri Baar Aah Kar Li Hai..

Aakhiri baar aah kar li hai,
Maine khud se nibaah kar li hai.

Apne sar ek bala to leni thi,
Maine wo zulf apne sar li hai.

Din bhala kis tarah guzaroge,
Wasl ki shab bhi ab guzar li hai.

Jaan-nisaron pe war kya karna,
Maine bas haath mein sipar li hai.

Jo bhi mango udhaar dunga main,
Us gali mein dukaan kar li hai.

Mera kashkol kab se khali tha,
Maine is mein sharab bhar li hai.

Aur to kuchh nahi kiya maine,
Apni haalat tabaah kar li hai.

Shaikh aaya tha mohtasib ko liye,
Maine bhi un ki wo khabar li hai. !!

आख़िरी बार आह कर ली है,
मैंने ख़ुद से निबाह कर ली है !

अपने सर इक बला तो लेनी थी,
मैंने वो ज़ुल्फ़ अपने सर ली है !

दिन भला किस तरह गुज़ारोगे,
वस्ल की शब भी अब गुज़र ली है !

जाँ-निसारों पे वार क्या करना,
मैंने बस हाथ में सिपर ली है !

जो भी माँगो उधार दूँगा मैं,
उस गली में दुकान कर ली है !

मेरा कश्कोल कब से ख़ाली था,
मैंने इस में शराब भर ली है !

और तो कुछ नहीं किया मैंने,
अपनी हालत तबाह कर ली है !

शैख़ आया था मोहतसिब को लिए,
मैंने भी उन की वो ख़बर ली है !!

-Jaun Elia Ghazal / Poetry

 

Kyun Kisi Aur Ko Dukh-Dard Sunaun Apne..

kyun kisi aur ko dukh sunaun apne

Kyun kisi aur ko dukh-dard sunaun apne,
Apni aankho mein bhi main zakhm chhupaun apne.

Main to qaem hun tere gham ki badaulat warna,
Yun bhikhar jaun ki khud ke haath na aaun apne.

Sher logon ko bahut yaad hai auron ke liye,
Tu mile to main tujhe sher sunaun apne.

Tere raste ka jo kanta bhi mayassar aaye,
Main use shauk se collar pe sajaun apne.

Sochta hun ki bujha dun main ye kamre ka diya,
Apne saye ko bhi kyon sath jagaun apne.

Us ki talwar ne wo chaal chali hai ab ke,
Panv kate hain agar haath bachaun apne.

Aakhiri baat mujhe yaad hai us ki “Anwar“,
Jaane wale ko gale se na lagaun apne. !!

क्यों किसी और को दुःख-दर्द सुनाओ अपने,
अपनी आँखों में भी मैं ज़ख़्म छुपाऊँ अपने !

मैं तो क़ायम हूँ तेरे गम की बदौलत वरना,
यूँ बिखर जाऊ की खुद के हाथ न आऊं अपने !

शेर लोगों को बहुत याद है औरों के लिए,
तू मिले तो मैं तुझे शेर सुनाऊ अपने !

तेरे रास्ते का जो कांटा भी मयससर आये,
मैं उसे शौक से कॉलर पे सजाऊँ अपने !

सोचता हूँ की बुझा दूँ मैं ये कमरे का दीया,
अपने साये को भी क्यों साथ जगाऊँ अपने !

उस की तलवार ने वो चाल चली है अब के,
पाँव कटते हैं अगर हाथ बचाऊँ अपने !

आख़िरी बात मुझे याद है उस की “अनवर“,
जाने वाले को गले से न लगाऊँ अपने !!