Manzar Poetry

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Manzar Poetry – आंखों के सामने से जो कुछ भी गुज़रता है वही मंज़र में तब्दील हो जाता है। कुछ मंज़र हम भूल जाते हैं और कुछ यादों के साथ रह जाते हैं। अलग-अलग मंज़रों पर शायरों ने अपने अल्फ़ाज़ लिखे हैं।