Wednesday , September 30 2020

Majburi Shayari

Majburi Shayari

 

Majburi Shayari ( मजबूरी शायरी ) – मजबूरी ज़िंदगी में तसलसुल के साथ पेश आने वाली एक सूरत-ए-हाल है जिस में इंसान की जो थोड़ी बहोत ख़ुद-मुख़्तारियत है वो भी ख़त्म हो जाती और इंसान पूरी तरह से मजबूर हो जाता है और यहीं से वो शायरी पैदा होती है जिस में बाज़ मर्तबा एहतिजाज भी होता है और बाज़ मर्तबा हालात के मुक़ाबले में सिपर अंदाज़ होने की कैफ़ियत भी। हम इस तरह के शेरों का एक छोटा सा इंतिख़ाब पेश कर रहे हैं।

 

 

Munawwar Rana “Maa” Shayari (Wah वह)

1. Kisi bhi mod par tumse wafadari nahi hogi, Humein maalum hai tum ko ye bimari nahi hogi. किसी भी मोड़ पर तुमसे वफ़ादारी नहीं होगी, हमें मालूम है तुम को ये बीमारी नहीं होगी ! 2. Neem ka ped tha barsaat thi aur jhula tha, Gaon mein gujara jamana …

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