Khamoshi Shayari

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Khamoshi Shayari ( ख़ामोशी शायरी ) – कभी कभी दिल की बात कहने के जुबां साथ नहीं देती तब ख़ामोशी ही साथ देती हैं, और एक यही ख़ामोशी हैं जिसमे कई राज़ छुपे होते हैं । ख़ामोशी में नाराजगी भी होती हैं और अपनापन भी होता हैं । प्यार का इज़हार भी होता हैं और किसी का तन्हाई में इंतज़ार भी होता हैं । सच ही कहते हैं लोग जो बात जुबां पर ना आ सके वो बात ख़ामोशी कह देती हैं ।

 

“ख़ामोशी” पर कहे शायरों के अल्फ़ाज़…

 

December Jab Se Aaya Hai Mere Khaamosh Kamre Mein

  December jab se aaya hai mere khaamosh kamre mein.., Mere bistar pe bikhri sab kitaabein bhig jaati hain..!! दिसंबर जब से आया है मेरे खामोश कमरे में.., मेरे बिस्तर पे बिखरी सब किताबें भीग जाती हैं..!!        

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Munawwar Rana “Maa” Shayari (Bhai भाई)

1. Main itani bebasi mein qaid-e-dushman mein nahi marta, Agar mera bhi ek Bhai ladkpan mein nahi marta. मैं इतनी बेबसी में क़ैद-ए-दुश्मन में नहीं मरता, अगर मेरा भी एक भाई लड़कपन में नहीं मरता ! 2. Kanton se bach gaya tha magar phool chubh gaya, Mere badan mein Bhai …

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