Wednesday , October 21 2020

Jannat Shayari

Jannat Shayari ( जन्नत शायरी ) – इंसान हजारों सालों से जन्नत की कल्पना करता आ रहा है, किसी ने जन्नत नहीं देखी लेकिन जब भी कोई किसी तरह के सौन्दर्य में खो कर सुख का एहसास करता है तो उसके मन में ‘जन्नत’ ही बिंब के रूप में उभरता है।

 

पेश है जन्नत-ए-जहां पर शायरों के कलाम-

 

Munawwar Rana “Maa” Part 4

1. Mera bachpan tha mera ghar tha khilaune the mere, Sar pe Maa-Baap ka saaya bhi ghazal jaisa tha. मेरा बचपन था मेरा घर था खिलौने थे मेरे, सर पे माँ-बाप का साया भी ग़ज़ल जैसा था ! 2. Mukaddas muskurahat Maa ke honthon par larzati hai, Kisi bacche ka …

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