Sunday , September 27 2020

Dawa Shayari

2 Line Dua Poetry In Hindi

2 Line Dua Poetry In HIndi

2 Line Dua Poetry In Hindi

2 Line Dua Poetry In Hindi बेहतरीन और चुनिंदा शायरी का संग्रह जो की दुआ शब्द को बहुत ही शानदार तरीके से वर्णित करता है ! दुआ पर हिंदी के ये शेर, आपके प्यार और भावनाओं को वक़्त करने में आपकी मदद कर सकते हैं ! यहाँ आप हर तरह की शायरी को पढ़ सकते है और अपने चाहने वालों को शेरे कर सकते हैं !

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Famous Dua Poetry In Hindi.

Auron ki burai na dekhun wo nazar de,
Haan apni burai ko parakhne ka hunar de.

औरों की बुराई को न देखूँ वो नज़र दे,
हाँ अपनी बुराई को परखने का हुनर दे !

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Main kya karun mere qatil na chahne par bhi,
Tere liye mere dil se dua niklati hai.

मैं क्या करूँ मेरे क़ातिल न चाहने पर भी,
तेरे लिए मेरे दिल से दुआ निकलती है !

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Abhi raah mein kai mod hain koi aayega koi jayega,
Tumein jis ne dil se bhula diya usse bhulne ki dua karo.

अभी राह में कई मोड़ हैं कोई आएगा कोई जायेगा,
तुम्हें जिस ने दिल से भुला दिया उसे भूलने की दुआ करो !

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Aakhir dua karein bhi to kis mudda ke saath,
Kaise zmeen ki baat kahein aasman se hum.

आखिर दुआ करें भी तो किस मुद्दे के साथ,
कैसे ज़मीन की बात कहें आसमान से हम !

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Abhi jinda hai maa meri mujhe kuch bhi nahi hoga,
Main ghar se jab nikalta hun dua bhi saath chalti hain.

अभी ज़िंदा है माँ मेरी मुझे कुछ भी नहीं होगा,
मैं घर से जब निकलता हूँ दुआ भी साथ चलती हैं !

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Dua ko haath uthate huye larjta hun,
Kabhi dua nahi mangi thi maa ke hote huye.

दुआ को हाथ उठाते हुए लरजता हूँ,
कभी दुआ नहीं मांगी थी माँ के होते हुए !

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Jab bhi kashti meri selaab mein aa jati hai,
Maa dua karti huyi khwaab mein aa jati hai.

जब भी कश्ती मेरी सैलाब में आ जाती है,
माँ दुआ करती हुई ख्वाब में आ जाती है !

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Jate ho khuda hafeez haan itni guzarish hai,
Jab yaad hum aa jayein milne ki dua karna.

जाते हो ख़ुदा हाफ़िज़ हाँ इतनी गुज़ारिश है,
जब याद हम आ जाएं मिलने की दुआ करना !

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Kyun mang rahe ho kisi baarish ki duayein,
Tum apne shiksta dar-o-deewar to dekho.

क्यों मांग रहे हो किसी बारिश की दुआएं,
तुम अपने शिकस्ता दर-ओ-दीवार तो देखो !

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Mang lun tujhse tujhi ko ki sabhi kuch mil jaye,
Sau sawalon se yahi ek sawal achcha hai.

मांग लूं तुझसे तुझी को की सभी कुछ मिल जाये,
सौ सवालों से यही एक सवाल अच्छा है !

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Mujhe zindagi ki dua dene wale,
Hansi aa rahi hai teri sadgi par.

मुझे ज़िन्दगी की दुआ देने वाले,
हंसी आ रही है तेरी सादगी पर !

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Koi charaah nahi dua ke siwa,
Koi suna nahi khuda ke siwa.

कोई चराह नहीं दुआ के सिवा,
कोई सुना नहीं खुदा के सिवा !

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Hazar bar jo manga karo kya hasil,
Dua wahi hai jo dil se kabhi nikalti hai.

हज़ार बार जो माँगा करो क्या हासिल,
दुआ वही है जो दिल से कभी निकलती है !

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Dua karo ki ye paudha hara hi lage,
Udasiyon mein bhi chehra khila hi lage.

दुआ करो कि ये पौधा हरा ही लगे,
उदासियों में भी चेहरा खिला ही लगे !

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Dua karo ki main us ke liye dua ho jaun,
Wo ek shakhas jo dil ko dua sa lagta hai.

दुआ करो कि मैं उस के लिए दुआ हो जाऊं,
वो एक शख्स जो दिल को दुआ सा लगता है !

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Mangi thi ek bar dua hum ne maut ki,
Sharminda aaj tak hain miyan zindagi se hum.

मांगी थी एक बार दुआ हम ने मौत की,
शर्मिंदा आज तक हैं मियां ज़िन्दगी से हम !

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Marz-e-ishq jise ho usse kya yaad rahe,
Na dawa yaad rahe aur na dua yaad rahe.

मर्ज़-ए-इश्क़ जिसे हो उससे क्या याद रहे,
न दवा याद रहे और न दुआ याद रहे !

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Maine din raat khuda se ye dua mangi thi,
Koi aahat na ho dar par mere jab tu aaye.

मैंने दिन रात खुदा से ये दुआ मांगी थी,
कोई आहट ना हो दर पर मेरे जब तू आये !

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Dur rahti hain sada un se balayein sahil,
Apne maa-baap ki jo roz dua lete hain.

दूर रहती हैं सदा उन से बलायें साहिल,
अपने माँ-बाप की जो रोज़ दुआ लेते हैं !

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Kisi ne chum ke aankhon ko ye dua di thi,
Zameen teri khuda motiyon se num kar de.

किसी ने चुम के आँखों को ये दुआ दी थी,
ज़मीन तेरी खुदा मोतियों से नुम कर दे !

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Tu salamat raho qayamat tak,
Aur qayamat kabhi na aaye “Shad”.

तू सलामत रहो क़यामत तक,
और क़यामत कभी न आये “शाद” !

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Wo bada rahim o qareem hai mujhe ye sifat bhi ataa kare,
Tujhe bhulne ki dua karun to meri dua mein asar na ho.

वो बड़ा रहीम ओ करीम है मुझे ये सिफ़त भी अता करे,
तुझे भूलने की दुआ करूँ तो मेरी दुआ में असर न हो !

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Ye bastiyan hai ki maqlat dua kiye jaye,
Dua ke din hai musalsal dua kiye jaye.

ये बस्तियां है की मकलत दुआ किये जाये,
दुआ के दिन है मुसलसल दुआ किये जाये !

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Wo sarkhushi de ki zindagi ko sharaab se bahar yaab kar de,
Mere khayalon mein rang bhar mere lahu ko sharaab kar de.

वो सरखुशी दे की ज़िन्दगी को शराब से बाहर याब कर दे,
मेरे ख्यालों में रंग भर मेरे लहू को शराब कर दे !

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Jaban pe shikwa-e-mehri-e-khuda kyun hai,
Dua to mangiye “Aatish” kabhi dua ki tarah.

जबान पे शिकवा-ए-मेहरी-ए-खुदा क्यों है,
दुआ तो मांगिये “आतिश” कभी दुआ की तरह !

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Hijr ki shab nala-e-dil wo sada dene lage,
Sunane wale raat ktne ki dua dene lage.

हिज्र की शब् नाला-ए-दिल वो सदा देने लगे,
सुनने वाले रात कटने की दुआ देने लगे !

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Kya-kya duayein mangte hain sab magar “asar”,
Apni yahi dua hai koi mudda na ho.

क्या-क्या दुआएं मांगते हैं सब मगर “असर”,
अपनी यही दुआ है कोई मुद्दा न हो !

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Sahraa ka safar tha to shajar kyun nahi aaya,
Mangi thi duayein to asar kyun nahi aaya.

सहरा का सफर था तो शजर क्यों नहीं आया,
मांगी थी दुआयें तो असर क्यों नहीं आया !

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Dekh kar tul-e-shab-e-hijr dua karta hun,
Wasl ke roz se bhi umar meri kam ho jaye.

देख कर तूल-ए-शब्-ए-हिज्र दुआ करता हूँ,
वस्ल के रोज़ से भी उम्र मेरी कम हो जाये !

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Raah ka sajar hun main aur ek musafir tu,
De koi dua mujh ko le koi dua mujh se.

राह का सजर हूँ मैं और एक मुसाफिर तू,
दे कोई दुआ मुझ को ले कोई दुआ मुझ से !

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Bhul hi jayein hum ko ye to na ho,
Log mere liye dua na karein.

भूल ही जाएं हम को ये तो न हो,
लोग मेरे लिए दुआ न करें !

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Aate hain barg-o-baar darkhaton ke jism par,
Tum bhi uthao haath ki mausam dua ka hai.

आते हैं बर्ग-ओ-बार दरख़्तों के जिस्म पर,
तुम भी उठाओ हाथ कि मौसम दुआ का है !

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Na charagar ki jrurat na kuch dawa ki hai,
Dua ko haath uthao ki gham ki raat kate.

न चारागर की जरुरत न कुछ दवा की है,
दुआ को हाथ उठाओ की ग़म की रात कटे !

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Dushman-e-jaan hi sahi dost samjata hun usse,
Bad-dua jis ki mujhe ban ke dua lagti hai.

दुश्मन-ए-जाँ ही सही दोस्त समझता हूँ उसे,
बद-दुआ जिस की मुझे बन के दुआ लगती है !

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Kaun deta hai mohabbat ko parstish ka maqam,
Tum ye insaaf se socho to dua do hum ko.

कौन देता है मोहब्बत को परस्तिश का मक़ाम,
तुम ये इन्साफ से सोचो तो दुआ दो हम को !

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Us marz ko marz-e-ishq kaha karte hain,
Na dawa hoti hai jis ki na dua hoti hai.

उस मरज़ को मरज़-ए-इश्क़ कहा करते हैं,
न दवा होती है जिस की न दुआ होती है !

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Zameen ko aye khuda wo jaljala de,
Nishan tak sarhdon ke jo mita de.

ज़मीं को ऐ ख़ुदा वो ज़लज़ला दे,
निशाँ तक सरहदों के जो मिटा दे !

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Ek teri tamana ne kuch yesa nawaza hai,
Mangi hi nahi jati ab koi dua hum se.

एक तेरी तमन्ना ने कुछ ऐसा नवाज़ा है,
माँगी ही नहीं जाती अब कोई दुआ हम से !

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Maut mangi thi khudai to nahi mangi thi,
Le dua kar chuke ab tark-e-dua karte hain.

मौत माँगी थी ख़ुदाई तो नहीं माँगी थी,
ले दुआ कर चुके अब तर्क-ए-दुआ करते हैं !

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Haye koi dawa karo haye koi dua karo,
Haye jigar mein dard hai haye jigar ka kya karun.

हाए कोई दवा करो हाए कोई दुआ करो,
हाए जिगर में दर्द है हाए जिगर का क्या करूँ !

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Us dushman-e-wafa ko dua de raha hun main,
Mera na ho saka wo kisi ka to ho gaya.

उस दुश्मन-ए-वफ़ा को दुआ दे रहा हूँ मैं,
मेरा न हो सका वो किसी का तो हो गया !

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Gham-e-dil ab kisi ke bas ka nahi,
Kya dawa kya dua kare koi.

ग़म-ए-दिल अब किसी के बस का नहीं,
क्या दवा क्या दुआ करे कोई !

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Ye mozja bhi kisi ki dua ka lagta hai
Ye shehar ab bhi usi bewafa ka lagta hai.

ये मोजज़ा भी किसी की दुआ का लगता है,
ये शहर अब भी उसी बे-वफ़ा का लगता है !

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Buland haathon mein zanjir dal dete hain,
Ajib rasm chali hai dua na mange koi.

बुलंद हाथों में जंजीर डाल देते हैं,
अजीब रस्म चली है दुआ ना मांगे कोई !

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Ye iltija dua ye tamana fuzul hai,
Sukhi nadi ke paas samundar na jayega.

ये इल्तिजा दुआ ये तमना फ़ुज़ूल है,
सूखी नदी के पास समुन्दर न जायेगा !

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Koi to phool khilaye dua ke lahze mein,
Ajab trah ki ghutan hai hawa ke lahze mein.

कोई तो फूल खिलाए दुआ के लहज़े में,
अजब तरह की घुटन है हवा के लहज़े में !

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Main zindagi ki dua mangne laga hun bahut,
Jo ho sake to duaon ko be-asar kar de.

मैं ज़िन्दगी की दुआ मांगने लगा हूँ बहुत,
जो हो सके तो दुआओं को बे-असर कर दे !

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Baki hi kya raha tujhe mangne ke baad,
Bas ek dua mein chut gaye dua se hum.

बाकी ही क्या रहा तुझे मांगने के बाद,
बस एक दुआ में छूट गए दुआ से हम !

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Na jane kon si manzil pe ishq aa pahuncha,
Dua bhi kaam na aaye koi dawa na lage.

न जाने कौन सी मंज़िल पे इश्क़ आ पहुंचा,
दुआ भी काम न आये कोई दवा न लगे !

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Manga kareinge ab se dua hijr-e-yaar ki,
Aakhir to dushmani hai asar ko dua ke saath.

माँगा करेंगे अब से दुआ हिज्र-ए-यार की,
आख़िर तो दुश्मनी है असर को दुआ के साथ !

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Duayein yaad kara di gayi thi bachpan mein,
So zakhm khate rahe aur dua diye gaye hum.

दुआएँ याद करा दी गई थीं बचपन में,
सो ज़ख़्म खाते रहे और दुआ दिए गए हम !

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Is liye chal na saka koi bhi khanjar mujh par,
Meri shah-rag pe meri maa ki dua rakkhi thi.

इस लिए चल न सका कोई भी ख़ंजर मुझ पर,
मेरी शह-रग पे मेरी माँ की दुआ रक्खी थी !

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Jab lagen zakhm to qatil ko dua di jaye,
Hai yahi rasm to ye rasm utha di jaye.

जब लगें ज़ख़्म तो क़ातिल को दुआ दी जाए,
है यही रस्म तो ये रस्म उठा दी जाए !

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-Dua Shayari / Poetry/ Status / Quotes

 

Dard To Maujud Hai Dil Mein Dawa Ho Ya Na Ho

Dard to maujud hai dil mein dawa ho ya na ho,
Bandagi haalat se zahir hai khuda ho ya na ho.

Jhumti hai shakh-e-gul khilte hain ghunche dam-ba-dam,
Ba-asar gulshan mein tahrik-e-saba ho ya na ho.

Wajd mein late hain mujh ko bulbulon ke zamzame,
Aap ke nazdik ba-mani sada ho ya na ho.

Kar diya hai zindagi ne bazm-e-hasti mein sharik,
Us ka kuch maqsud koi muddaa ho ya na ho.

Kyun ciwil-surgeon ka aana rokta hai ham-nashin,
Is mein hai ek baat honour ki shifa ho ya na ho.

Maulwi sahib na chhodenge khuda go bakhsh de,
Gher hi lenge police wale saza ho ya na ho.

Membari se aap par to warnish ho jayegi,
Qaum ki haalat mein kuch is se jila ho ya na ho.

Motariz kyun ho agar samjhe tumhein sayyaad dil,
Aaise gesu hun to shubah dam ka ho ya na ho. !!

दर्द तो मौजूद है दिल में दवा हो या न हो,
बंदगी हालत से ज़ाहिर है ख़ुदा हो या न हो !

झूमती है शाख़-ए-गुल खिलते हैं ग़ुंचे दम-ब-दम,
बा-असर गुलशन में तहरीक-ए-सबा हो या न हो !

वज्द में लाते हैं मुझ को बुलबुलों के ज़मज़मे,
आप के नज़दीक बा-मअनी सदा हो या न हो !

कर दिया है ज़िंदगी ने बज़्म-ए-हस्ती में शरीक,
उस का कुछ मक़्सूद कोई मुद्दआ हो या न हो !

क्यूँ सिवल-सर्जन का आना रोकता है हम-नशीं,
इस में है इक बात ऑनर की शिफ़ा हो या न हो !

मौलवी साहिब न छोड़ेंगे ख़ुदा गो बख़्श दे,
घेर ही लेंगे पुलिस वाले सज़ा हो या न हो !

मिमबरी से आप पर तो वार्निश हो जाएगी,
क़ौम की हालत में कुछ इस से जिला हो या न हो !

मोतरिज़ क्यूँ हो अगर समझे तुम्हें सय्याद दिल,
ऐसे गेसू हूँ तो शुबह दाम का हो या न हो !!

-Akbar Allahabadi Ghazal / Urdu Poetry

 

Dil-E-Nadan Tujhe Hua Kya Hai..

Dil-e-nadan tujhe hua kya hai

 

Dil-e-nadan tujhe hua kya hai,
Aakhir is dard ki dawa kya hai.

Hum hain mushtaq aur wo bezar,
Ya ilahi ye majra kya hai.

Main bhi munh mein zaban rakhta hun,
Kash puchho ki muddaa kya hai.

Jab ki tujh bin nahi koi maujud,
Phir ye hangama aye khuda kya hai.

Ye pari chehra log kaise hain,
Ghamza o ishwa o ada kya hai.

Shikan-e-zulf-e-ambarin kyun hai,
Nigah-e-chashm-e-surma sa kya hai.

Sabza o gul kahan se aaye hain,
Abr kya chiz hai hawa kya hai.

Hum ko un se wafa ki hai ummid,
Jo nahi jaante wafa kya hai.

Han bhala kar tera bhala hoga,
Aur darwesh ki sada kya hai.

Jaan tum par nisar karta hun,
Main nahi jaanta dua kya hai.

Main ne mana ki kuch nahi “Ghalib
Muft hath aaye to bura kya hai. !!

दिल-ए-नादाँ तुझे हुआ क्या है,
आख़िर इस दर्द की दवा क्या है !

हम हैं मुश्ताक़ और वो बेज़ार,
या इलाही ये माजरा क्या है !

मैं भी मुँह में ज़बान रखता हूँ,
काश पूछो कि मुद्दा क्या है !

जब कि तुझ बिन नहीं कोई मौजूद,
फिर ये हंगामा ऐ ख़ुदा क्या है !

ये परी-चेहरा लोग कैसे हैं,
ग़म्ज़ा ओ इश्वा ओ अदा क्या है !

शिकन-ए-ज़ुल्फ़-ए-अंबरीं क्यूँ है,
निगह-ए-चश्म-ए-सुरमा सा क्या है !

सब्ज़ा ओ गुल कहाँ से आए हैं,
अब्र क्या चीज़ है हवा क्या है !

हम को उन से वफ़ा की है उम्मीद,
जो नहीं जानते वफ़ा क्या है !

हाँ भला कर तेरा भला होगा,
और दरवेश की सदा क्या है !

जान तुम पर निसार करता हूँ,
मैं नहीं जानता दुआ क्या है !

मैं ने माना कि कुछ नहीं ‘ग़ालिब‘,
मुफ़्त हाथ आए तो बुरा क्या है !!

– मिर्ज़ा ग़ालिब

 

Bimar Ko Maraz Ki Dawa Deni Chahiye..

Bimar ko maraz ki dawa deni chahiye,
Main pina chahta hun pila deni chahiye.

Allah barkaton se nawazega ishq mein,
Hai jitni punji pas laga deni chahiye.

Dil bhi kisi faqir ke hujre se kam nahi,
Duniya yahin pe la ke chhupa deni chahiye.

Main khud bhi karna chahta hun apna samna,
Tujh ko bhi ab naqab utha deni chahiye.

Main phool hun to phool ko gul-dan ho nasib,
Main aag hun to aag bujha deni chahiye.

Main taj hun to taj ko sar par sajayen log,
Main khak hun to khak uda deni chahiye.

Main jabr hun to jabr ki taid band ho,
Main sabr hun to mujh ko dua deni chahiye.

Main khwab hun to khwab se chaunkaiye mujhe,
Main nind hun to nind uda deni chahiye.

Sach baat kaun hai jo sar-e-am kah sake,
Main kah raha hun mujh ko saza deni chahiye. !!

बीमार को मरज़ की दवा देनी चाहिए,
मैं पीना चाहता हूँ पिला देनी चाहिए !

अल्लाह बरकतों से नवाज़ेगा इश्क़ में,
है जितनी पूँजी पास लगा देनी चाहिए !

दिल भी किसी फ़क़ीर के हुजरे से कम नहीं,
दुनिया यहीं पे ला के छुपा देनी चाहिए !

मैं ख़ुद भी करना चाहता हूँ अपना सामना,
तुझ को भी अब नक़ाब उठा देनी चाहिए !

मैं फूल हूँ तो फूल को गुल-दान हो नसीब,
मैं आग हूँ तो आग बुझा देनी चाहिए !

मैं ताज हूँ तो ताज को सर पर सजाएँ लोग,
मैं ख़ाक हूँ तो ख़ाक उड़ा देनी चाहिए !

मैं जब्र हूँ तो जब्र की ताईद बंद हो,
मैं सब्र हूँ तो मुझ को दुआ देनी चाहिए !

मैं ख़्वाब हूँ तो ख़्वाब से चौंकाइए मुझे,
मैं नींद हूँ तो नींद उड़ा देनी चाहिए !

सच बात कौन है जो सर-ए-आम कह सके,
मैं कह रहा हूँ मुझ को सज़ा देनी चाहिए !!

-Rahat Indori Ghazal / Poetry