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Khanjar Shayari

Mere Junoon Ka Natija Zarur Niklega..

Mere junoon ka natija zarur niklega,
Isi siyah samundar se nur niklega.

Gira diya hai to sahil pe intezaar na kar,
Agar wo dub gaya hai to dur niklega.

Usi ka shahr wahi muddai wahi munsif,
Hamein yakin tha hamara kusoor niklega.

Yakin na aaye to ek baat puchh kar dekho,
Jo hans raha hai wo zakhmon se chur niklega.

Us aastin se ashkon ko pochhne wale,
Us aastin se khanjar zarur niklega. !!

मेरे जुनूँ का नतीजा ज़रूर निकलेगा,
इसी सियाह समुंदर से नूर निकलेगा !

गिरा दिया है तो साहिल पे इंतिज़ार न कर,
अगर वो डूब गया है तो दूर निकलेगा !

उसी का शहर वही मुद्दई वही मुंसिफ़,
हमें यक़ीं था हमारा क़ुसूर निकलेगा !

यक़ीं न आए तो एक बात पूछ कर देखो,
जो हँस रहा है वो ज़ख़्मों से चूर निकलेगा !

उस आस्तीन से अश्कों को पोछने वाले,
उस आस्तीन से ख़ंजर ज़रूर निकलेगा !!

Amir Qazalbash All Poetry, Ghazal, Sad Shayari & Nazms Collection