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Dawa Shayari

Bimar ko maraz ki dawa deni chahiye..

Bimar ko maraz ki dawa deni chahiye,
Main pina chahta hun pila deni chahiye.

Allah barkaton se nawazega ishq mein,
Hai jitni punji pas laga deni chahiye.

Dil bhi kisi faqir ke hujre se kam nahi,
Duniya yahin pe la ke chhupa deni chahiye.

Main khud bhi karna chahta hun apna samna,
Tujh ko bhi ab naqab utha deni chahiye.

Main phool hun to phool ko gul-dan ho nasib,
Main aag hun to aag bujha deni chahiye.

Main taj hun to taj ko sar par sajayen log,
Main khak hun to khak uda deni chahiye.

Main jabr hun to jabr ki taid band ho,
Main sabr hun to mujh ko dua deni chahiye.

Main khwab hun to khwab se chaunkaiye mujhe,
Main nind hun to nind uda deni chahiye.

Sach baat kaun hai jo sar-e-am kah sake,
Main kah raha hun mujh ko saza deni chahiye. !!

बीमार को मरज़ की दवा देनी चाहिए,
मैं पीना चाहता हूँ पिला देनी चाहिए !

अल्लाह बरकतों से नवाज़ेगा इश्क़ में,
है जितनी पूँजी पास लगा देनी चाहिए !

दिल भी किसी फ़क़ीर के हुजरे से कम नहीं,
दुनिया यहीं पे ला के छुपा देनी चाहिए !

मैं ख़ुद भी करना चाहता हूँ अपना सामना,
तुझ को भी अब नक़ाब उठा देनी चाहिए !

मैं फूल हूँ तो फूल को गुल-दान हो नसीब,
मैं आग हूँ तो आग बुझा देनी चाहिए !

मैं ताज हूँ तो ताज को सर पर सजाएँ लोग,
मैं ख़ाक हूँ तो ख़ाक उड़ा देनी चाहिए !

मैं जब्र हूँ तो जब्र की ताईद बंद हो,
मैं सब्र हूँ तो मुझ को दुआ देनी चाहिए !

मैं ख़्वाब हूँ तो ख़्वाब से चौंकाइए मुझे,
मैं नींद हूँ तो नींद उड़ा देनी चाहिए !

सच बात कौन है जो सर-ए-आम कह सके,
मैं कह रहा हूँ मुझ को सज़ा देनी चाहिए !!